लखनऊ/10 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। एल्युमिनियम बेवरेज कैन और एडवांस पैकेजिंग के क्षेत्र में दुनिया की तीन प्रमुख कंपनियां उत्तर प्रदेश में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने जा रही हैं। बॉल कॉर्पोरेशन, क्राउन होल्डिंग्स और कैनपैक मेरठ और उन्नाव में कुल 6,566 करोड़ रुपये का निवेश कर रही हैं।
इन परियोजनाओं को केवल नए कारखानों की स्थापना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इससे प्रदेश में पैकेजिंग मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम विकसित होने की उम्मीद है। उत्पादन के साथ सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, स्थानीय सोर्सिंग और कौशल विकास से जुड़े क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ेंगी।
इसी क्रम में गुरुवार को क्राउन होल्डिंग्स और बॉल कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। सरकार का दावा है कि उद्योग-अनुकूल नीतियों और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण वैश्विक कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश निवेश के लिहाज से तेजी से आकर्षक गंतव्य बन रहा है।
यूपी में निवेश: उन्नाव में क्राउन होल्डिंग्स लगाएगी भारत की पहली यूनिट
क्राउन होल्डिंग्स उन्नाव के इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के माध्यम से 2,078.44 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। खास बात यह है कि भारत में क्राउन होल्डिंग्स की यह पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट होगी।
करीब 40 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाले इस प्लांट का भूमिपूजन बुधवार को हो चुका है। परियोजना के शुरुआती चरण में यहां हर साल करीब 116.2 करोड़ एल्युमिनियम कैन बनाने की क्षमता होगी।
रोजगार के लिहाज से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। इससे सीधे तौर पर 209 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से 1,500 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
मेरठ में बॉल कॉर्पोरेशन का 2,913 करोड़ का निवेश
वैश्विक पैकेजिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बॉल कॉर्पोरेशन, अपनी भारतीय इकाई बॉल बेवरेज पैकेजिंग इंडिया के माध्यम से मेरठ के आईएमएलसी में 2,913 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव लेकर आई है।
करीब 40 एकड़ में प्रस्तावित इस यूनिट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बेवरेज, एफएमसीजी और फूड प्रोसेसिंग उद्योग के लिए अहम माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर कैन निर्माण होने से इन क्षेत्रों की कंपनियों को अपने उत्पादन केंद्रों के करीब पैकेजिंग की आपूर्ति मिल सकेगी।
इस निवेश का एक दूसरा पहलू भी है। अत्याधुनिक विनिर्माण तकनीक के आने से स्थानीय स्तर पर तकनीकी दक्षता बढ़ने और स्किल डेवलपमेंट को गति मिलने की संभावना है। साथ ही स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को भी वैश्विक कंपनियों की सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
उन्नाव में कैनपैक की 1,574 करोड़ की ग्रीनफील्ड यूनिट
उन्नाव में ही पैकेजिंग सेक्टर की एक और बड़ी परियोजना आकार लेने जा रही है। कैनपैक इंडिया करीब 1,574.62 करोड़ रुपये के निवेश से ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम बेवरेज कैन यूनिट स्थापित करने की तैयारी में है।
यह प्लांट करीब 26 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसकी प्रस्तावित वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 130 करोड़ कैन होगी।
एक ही क्षेत्र में क्राउन होल्डिंग्स और कैनपैक जैसी कंपनियों की मौजूदगी से उन्नाव में एल्युमिनियम पैकेजिंग से जुड़े उद्योगों का क्लस्टर विकसित होने की संभावना मजबूत हुई है। आने वाले समय में इसका असर केवल इन दोनों कंपनियों तक सीमित रहने के बजाय आसपास के कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
सिर्फ फैक्ट्रियां नहीं, पूरी सप्लाई चेन को मिलेगा फायदा
इतने बड़े पैमाने पर यूपी में निवेश का प्रभाव कारखानों की चारदीवारी से बाहर निकलने की उम्मीद है। एल्युमिनियम कैन निर्माण के लिए कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर परिवहन, वेयरहाउसिंग और तैयार उत्पाद की डिलीवरी तक एक विस्तृत सप्लाई नेटवर्क की जरूरत होगी।
इसका फायदा स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को भी मिल सकता है। पैकेजिंग, मशीनरी सपोर्ट, रखरखाव, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियों में नए कारोबारी अवसर बनने की संभावना है। यानी बड़े निवेश के साथ छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी बाजार का दायरा बढ़ सकता है।
एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और औद्योगिक क्लस्टर बने आधार
मेरठ और उन्नाव में विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) इस औद्योगिक विस्तार की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) से जुड़े इन क्लस्टर्स में औद्योगिक बुनियादी ढांचे और बेहतर कनेक्टिविटी को निवेश आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा बनाया गया है।
वैश्विक कंपनियों का इस क्षेत्र में आना यह संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब केवल निवेश प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि बड़े उद्योगों को जमीन पर उतारने के लिए औद्योगिक क्लस्टर, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को एक साथ विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का वास्तविक असर उत्पादन शुरू होने और स्थानीय रोजगार व सप्लाई चेन के विस्तार के साथ अधिक स्पष्ट होगा।









