लखनऊ/6 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच राज्य सरकार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 19 अक्टूबर 2026 को जापान के यामानाशी प्रांत के चार दिवसीय दौरे पर जाएगा। इस यात्रा का मुख्य फोकस ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के क्षेत्र में जापानी कंपनियों से निवेश और तकनीकी सहयोग हासिल करना होगा।
मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी के नेतृत्व में जाने वाले 15 सदस्यीय दल में औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA), आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी शामिल होंगे।
जापानी निवेश के लिए फिर सक्रिय हुआ उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश और जापान के बीच निवेश एवं तकनीकी सहयोग की कड़ी पिछले कुछ समय में लगातार मजबूत हुई है। जनवरी 2026 में जापानी निवेशकों का दल उत्तर प्रदेश आया था। इसके बाद जापानी निवेशकों के दो दौरे प्रदेश में हो चुके हैं। इन दौरों के दौरान निवेशकों को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में प्रस्तावित जापानी सिटी के साथ-साथ लखनऊ और अन्य जिलों में उपलब्ध जमीन तथा सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी की जानकारी दी गई।
अगले चरण में अब उत्तर प्रदेश सरकार खुद जापान जाकर निवेश के प्रस्तावों को आगे बढ़ाएगी। खासतौर पर स्वच्छ ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण रहने वाली है।
ग्रीन हाइड्रोजन पर खास नजर
जापानी कंपनी कनाडेविया कॉरपोरेशन उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगाने में रुचि दिखा चुकी है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने प्रदेश में संभावित स्थानों का दौरा भी किया है और एनटीपीसी तथा इंडियन ऑयल के साथ परियोजना की संभावनाओं पर चर्चा की है। Jagran
अगस्त में हुए UP-Japan Investment Meet 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक, उत्पादन, अनुसंधान और निवेश को लेकर समझौता भी हुआ था। यामानाशी हाइड्रोजन कंपनी और कनाडेविया कॉरपोरेशन के सहयोग से उत्तर प्रदेश में एक उच्च क्षमता वाली पायलट परियोजना का प्रस्ताव रखा गया है।
इस परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी फरवरी 2027 तक पूरी करने और मार्च 2027 तक व्यावसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा गया है।
IIT कानपुर और BHU को भी मिलेगा तकनीकी सहयोग
जापान के साथ सहयोग केवल निवेश तक सीमित नहीं है। कनाडेविया के साथ IIT कानपुर और BHU में स्थापित किए जा रहे ग्रीन हाइड्रोजन एक्सीलेंस सेंटरों के लिए तकनीकी सहयोग को लेकर पहले ही एमओयू हो चुका है। इससे प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता विकसित करने की कोशिश को बल मिल सकता है।
यामानाशी ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए अपनी Power-to-Gas (P2G) तकनीक भी प्रस्तुत की है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा से पैदा होने वाली बिजली का इस्तेमाल पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए हाइड्रोजन बनाने में किया जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और GCC में भी निवेश की उम्मीद
आगामी जापान दौरे में केवल ग्रीन हाइड्रोजन ही एजेंडे में नहीं होगा। राज्य सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के क्षेत्र में भी जापानी कंपनियों के साथ निवेश प्रस्तावों पर बातचीत करेगी। इससे प्रदेश में उच्च तकनीक वाले उद्योगों के साथ रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की जापान नीति में यामानाशी को विशेष महत्व मिल रहा है। इन्वेस्ट यूपी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 2026 में उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सहयोग से जुड़ी कई पहलों और निवेश प्रस्तावों को प्रमुखता दी गई है।
ऐसे में 19 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह चार दिवसीय दौरा पहले से चल रही बातचीत को निवेश और परियोजनाओं में बदलने की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।









