नई दिल्ली/15 अक्टूबर 2026: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरे देश से विदाई की घोषणा की। इसके साथ ही दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय हो गया है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में 21 अक्टूबर तक भारी बारिश हो सकती है।
इसी बीच, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो की स्थिति मजबूत होने का अनुमान जताया है। वैश्विक पूर्वानुमानों के अनुसार, यह मौसमी घटना दिसंबर 2026 में चरम पर पहुंच सकती है और फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है। इससे दुनिया के कई क्षेत्रों में तापमान और बारिश के सामान्य पैटर्न में बदलाव आने की आशंका है।
दक्षिण भारत के इन राज्यों में बारिश की संभावना
दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के बाद अब दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून की गतिविधियां महत्वपूर्ण हो गई हैं। इस मौसम में तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का विशेष महत्व रहता है। यहां होने वाली वर्षा खेती, जलाशयों और स्थानीय जलापूर्ति के लिए अहम होती है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, इन क्षेत्रों पर नजर रखना जरूरी है:
- तमिलनाडु और पुडुचेरी: बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना।
- कराईकल: पूर्वोत्तर मानसून के प्रभाव से वर्षा के आसार।
- तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा: कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना।
- दक्षिण आंतरिक कर्नाटक: मानसूनी गतिविधियों का असर देखने को मिल सकता है।
- केरल और माहे: कुछ क्षेत्रों में वर्षा की संभावना।
स्थानीय स्तर पर बारिश की तीव्रता अलग-अलग हो सकती है। यात्रा करने वाले लोगों और किसानों को ताजा मौसम बुलेटिन पर नजर रखनी चाहिए।
इस साल सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम हुई बारिश
IMD के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान भारत में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह 868.6 मिलीमीटर के सामान्य औसत से 12.6 प्रतिशत कम है।
मानसून की बारिश का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहता। खेती, जल संसाधन, ग्रामीण रोजगार और खाद्य उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। बारिश में कमी वाले क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और जलाशयों की स्थिति पर अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत हो सकती है।
क्या है अल नीनो और भारत के मौसम पर इसका असर?
अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की गर्म अवस्था है। यह मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों में तापमान, हवा और वर्षा के पैटर्न पर पड़ सकता है।
भारत में अल नीनो की स्थिति अक्सर कमजोर मानसूनी बारिश से जुड़ी रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर अल नीनो वर्ष में देश के सभी हिस्सों में बारिश कम ही होगी। क्षेत्रीय परिस्थितियां और अन्य जलवायु कारक भी मौसम को प्रभावित करते हैं।
इसके विपरीत, ला नीना प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के अपेक्षाकृत ठंडे तापमान से जुड़ी अवस्था है। ENSO की तीसरी अवस्था तटस्थ स्थिति कहलाती है।
दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो
WMO की 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। संगठन ने कहा कि अल नीनो दिसंबर में अपने संभावित चरम पर पहुंचने से पहले और मजबूत हो सकता है।
WMO के अनुसार, फरवरी 2027 तक अल नीनो के बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत है। यह घटना 1950 के बाद की सबसे मजबूत घटनाओं में से एक हो सकती है। हालांकि, यह वैश्विक पूर्वानुमान है; भारत के किसी खास राज्य में बारिश या सूखे की स्थिति का आकलन अलग क्षेत्रीय पूर्वानुमानों के आधार पर किया जाना चाहिए।
किसानों और आम लोगों के लिए क्यों अहम है यह मौसम बदलाव?
मानसून की विदाई और पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत के बीच का समय कृषि और जल प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में अक्टूबर से दिसंबर तक होने वाली बारिश खेती और जलाशयों के लिए अहम योगदान देती है।
अल नीनो की मजबूती से वैश्विक तापमान और वर्षा के वितरण में बदलाव की आशंका है। ऐसे में किसानों के लिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुरूप बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन की योजना बनाना उपयोगी होगा।
निष्कर्ष: दक्षिण-पश्चिम मानसून देश से विदा हो चुका है, लेकिन दक्षिण भारत में बारिश का दौर अभी जारी रह सकता है। दूसरी ओर, दिसंबर में अल नीनो के संभावित चरम को देखते हुए आने वाले महीनों में मौसम की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी होगा। फिलहाल किसी राज्य में सूखे या अत्यधिक बारिश को निश्चित मानने के बजाय IMD के क्षेत्रवार पूर्वानुमानों को प्राथमिकता देनी चाहिए।













