राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

चावल के दाम बढ़ने के आसार: धान का रकबा 16.37 लाख हेक्टेयर घटा, रबी की फसलों पर भी संकट

On: October 18, 2026
Follow Us:
चावल के दाम बढ़ने के आसार, धान का रकबा घटा, रबी की फसलों पर भी संकट
---Advertisement---

नई दिल्ली/18 अक्टूबर 2026: देश में कमजोर मानसून और धान की खेती के घटते रकबे ने कृषि उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खरीफ सीजन में धान की बुआई का क्षेत्र घटने के बीच बाजार में चावल के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं। अब उत्पादन में संभावित गिरावट के अनुमान से आने वाले महीनों में कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसका असर केवल चावल तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि गेहूं, सरसों और चने जैसी रबी की फसलों की पैदावार भी मौसम और सिंचाई की उपलब्धता से प्रभावित हो सकती है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में धान का रकबा पिछले साल के 438.19 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 421.82 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी इसमें 16.37 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। दूसरी ओर, सामान्य से कम बारिश और कई राज्यों में सूखे जैसी परिस्थितियों ने फसलों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि, चावल की वास्तविक पैदावार और बाजार में उपलब्धता की तस्वीर फसल की कटाई तथा सरकारी भंडार के आंकड़ों के बाद ही स्पष्ट होगी।

चावल के दाम बढ़ने के आसार, खुदरा बाजार में दिखने लगा असर

धान की बुआई में कमी और उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता का असर चावल के बाजार पर दिखाई देने लगा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, चावल का औसत खुदरा मूल्य 46.92 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक बताया गया है।

बाजार में सोना मसूरी, पोन्नी और स्वर्णा जैसी चावल की किस्मों के दाम में भी 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। यदि नई फसल की आवक अनुमान से कम रहती है और मांग बनी रहती है, तो कीमतों में आगे भी तेजी आ सकती है।

हालांकि, खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा कारण केवल धान के घटे रकबे को नहीं माना जा सकता। उत्पादन, मंडियों में आवक, परिवहन लागत, सरकारी भंडार और घरेलू मांग जैसे कई कारक चावल के अंतिम भाव तय करते हैं।

धान का रकबा 16.37 लाख हेक्टेयर घटा, उत्तर प्रदेश भी प्रभावित

कृषि मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस खरीफ सीजन में देश में धान की खेती का कुल क्षेत्रफल घटा है। उत्तर प्रदेश के पूर्वी और तराई क्षेत्रों में भी धान का रकबा प्रभावित हुआ है।

राज्य में धान की खेती का क्षेत्रफल 1.84 लाख हेक्टेयर घटकर 59.8 लाख हेक्टेयर रह जाने की जानकारी दी गई है। इन क्षेत्रों में धान की खेती किसानों की आजीविका और स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था का अहम आधार है। ऐसे में बुआई का क्षेत्र घटने से किसानों की आमदनी और मंडियों में आने वाली फसल, दोनों पर असर पड़ सकता है।

हरियाणा में भी धान उत्पादन को लेकर चिंता जताई गई है। उपलब्ध अनुमान के अनुसार, राज्य में उत्पादन पिछले साल के 97.05 लाख टन से घटकर इस बार 70 से 75 लाख टन रह सकता है। यह अभी अनुमानित आंकड़ा है, अंतिम उत्पादन की पुष्टि फसल कटाई और आधिकारिक आकलन के बाद ही होगी।

13 प्रतिशत कम बारिश से खेती पर दबाव

कमजोर मानसून ने खरीफ फसलों की बुआई और विकास को प्रभावित किया है। उपलब्ध आंकड़ों में देश में सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने की बात कही गई है। पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों में भी बारिश की कमी का उल्लेख किया गया है।

दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में बारिश करीब 33 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 25 प्रतिशत और हरियाणा में सितंबर तक 27 प्रतिशत कम रही। बारिश की कमी का सीधा असर उन क्षेत्रों में अधिक पड़ सकता है जहां किसान सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर हैं।

भारत सूखा निगरानी केंद्र, आईआईटी गांधीनगर के हवाले से देश के 70.6 प्रतिशत हिस्से के सूखे की चपेट में होने का आंकड़ा भी दिया गया है। इस आंकड़े की अवधि और सूखे की परिभाषा की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है, क्योंकि सूखा प्रभावित क्षेत्र का आकलन अलग-अलग समय और मानकों के आधार पर बदल सकता है।

चावल का उत्पादन 3 से 4 प्रतिशत घटने का अनुमान

तिरुपति एग्री ट्रेड लिमिटेड के सीईओ सूरज अग्रवाल के अनुसार, मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण चावल के उत्पादन में 3 से 4 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अनिश्चितता और कुछ देशों की भंडार बढ़ाने की रणनीति से मांग पर दबाव पड़ने की आशंका है।

यदि उत्पादन में गिरावट आती है और बाजार में मांग मजबूत बनी रहती है, तो चावल की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है। हालांकि, कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह नई फसल की वास्तविक उपलब्धता, सरकारी खरीद और भंडार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

धान की मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से करीब 1,500 रुपये ऊपर भाव मिलने की जानकारी भी दी गई है। लेकिन यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह भाव किन मंडियों, किस धान की किस्म और किस गुणवत्ता के लिए दर्ज किया गया है। मंडी भाव और उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली खुदरा कीमत में अंतर होता है।

विशेषज्ञों की राय: अभी से चावल की कमी मानना जल्दबाजी

धान उत्पादन को लेकर जताई जा रही आशंकाओं के बीच कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले फसल की वास्तविक स्थिति और सरकारी भंडार को देखना जरूरी है।

पूसा के वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्पादन में कमी की संभावना के बावजूद देश की कुल आपूर्ति पर बहुत अधिक असर पड़ना जरूरी नहीं है, क्योंकि उपलब्ध सरकारी भंडार बाजार की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है।

धान विशेषज्ञ चौधरी रामचेत का भी कहना है कि फिलहाल उत्पादन में कमी को लेकर अनुमान सामने आ रहे हैं। वास्तविक तस्वीर कटाई के बाद ही साफ होगी। अगेती और पछेती किस्मों के प्रदर्शन में अंतर होने से संभावित नुकसान की कुछ हद तक भरपाई भी हो सकती है।

काला नमक चावल की फसल पर बड़े असर की जानकारी नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग किस्मों और क्षेत्रों में उत्पादन की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए पूरे देश के चावल बाजार के बारे में एक ही अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

धान की लागत बढ़ने से चावल निर्यातकों के मुनाफे पर दबाव

धान की कीमतों और उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता का असर चावल निर्यात कारोबार पर भी पड़ सकता है। पंजाब के आईआरईएफ अध्यक्ष अमन सिंगल के अनुसार, भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धी कीमतों ने बासमती और गैर-बासमती दोनों श्रेणियों में वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है।

लेकिन यदि कच्चे माल की लागत बढ़ती है और उपलब्धता अनिश्चित रहती है, तो निर्यातकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में निर्यात की कीमतों और कारोबार की प्रतिस्पर्धात्मकता पर भी असर पड़ने की आशंका है।

हालांकि, निर्यात पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए घरेलू कीमतों, अंतरराष्ट्रीय मांग, निर्यात नीतियों और प्रतिस्पर्धी देशों की आपूर्ति को भी देखना होगा।

गेहूं, सरसों और चने की बुआई पर भी संकट के बादल

खरीफ के बाद अब रबी सीजन की तैयारियों पर नजर है। गेहूं, सरसों और चने जैसी प्रमुख फसलों की बुआई तथा पैदावार के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी और जरूरत के अनुसार सिंचाई महत्वपूर्ण होती है। यदि बारिश की कमी बनी रहती है और भूजल स्तर नीचे जाता है, तो किसानों की सिंचाई लागत बढ़ सकती है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियों तथा भूजल स्तर में गिरावट को लेकर चिंता जताई गई है। कुछ इलाकों में सिंचाई के पानी की उपलब्धता भी चुनौती बन सकती है।

रबी की पैदावार में 5 से 7 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका का अनुमान दिया गया है, लेकिन इसे अभी पुष्ट उत्पादन आंकड़ा नहीं माना जा सकता। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी महीनों में मौसम कैसा रहता है, मिट्टी में कितनी नमी बची है और किसान सिंचाई की कितनी व्यवस्था कर पाते हैं।

क्या आने वाले महीनों में अनाज महंगा होगा?

धान का घटा रकबा, बारिश की कमी और उत्पादन को लेकर अनिश्चितता ऐसे कारक हैं जो चावल के बाजार पर दबाव बना सकते हैं। यदि नई फसल की आवक कम रहती है, तो कीमतों में आगे बढ़ोतरी संभव है। वहीं, सरकारी भंडार पर्याप्त रहने और बाजार में आपूर्ति सामान्य बने रहने पर तेजी को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

रबी फसलों के मामले में भी अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आने वाले महीनों में बारिश, सिंचाई की उपलब्धता, बुआई के रकबे और फसल की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि धान की वास्तविक पैदावार कितनी रहती है और सरकारी तथा निजी भंडार बाजार की मांग को पूरा करने में कितने सक्षम होते हैं। इन दोनों स्थितियों से ही आने वाले महीनों में चावल की कीमतों और अनाज की उपलब्धता की दिशा काफी हद तक तय होगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दुर्गा पूजा पर संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दुर्गा पूजा पर संदेश: ‘महिलाओं का सम्मान ही सच्ची भक्ति’, जानें मां दुर्गा की विजय का महत्व

दिवाली-छठ पर रेलवे का तोहफा

दिवाली-छठ पर रेलवे का तोहफा: दिल्ली, यूपी और बिहार के लिए चलेंगी 4 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें, देखें रूट और तारीखें

UP में किसानों के बच्चों की छात्रवृत्ति सीटें दोगुनी

UP में किसानों के बच्चों की छात्रवृत्ति सीटें दोगुनी, अब सालाना मिलेंगे 60 हजार रुपये

CISF में 1 नवंबर से बड़ा बदलाव

CISF में 1 नवंबर से बड़ा बदलाव: बिजली, कोयला और स्टील के लिए बनेंगे अलग सेक्टर, जानें सुरक्षा व्यवस्था पर क्या होगा असर

कोलकाता दुर्गा पंडाल हादसा, कुप्रबंधन और भ्रामक घोषणा से मची भगदड़

कोलकाता दुर्गा पंडाल हादसा: कुप्रबंधन और भ्रामक घोषणा से मची भगदड़, 19 की मौत, 25 घायल

कैंसर की 137 दवाएं होंगी सस्ती, 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें

कैंसर की 137 दवाएं होंगी सस्ती: 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें, मरीजों को मिल सकती है बड़ी राहत