लखनऊ (19 अक्टूबर 2026)। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में दोहरे नामों का मामला तूल पकड़ रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही मतदाता के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने की शिकायतों के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्ती बढ़ा दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने अधिकारियों को दोहरी प्रविष्टियों की जांच कर जल्द निस्तारण करने और लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
यूपी की वोटर लिस्ट में दोहरे नामों की जांच के निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सोमवार को जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में दर्ज दोहरे नामों के मामलों को गंभीरता से लिया जाए। आगामी 12 नवंबर को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में ऐसी गड़बड़ियों को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
निर्देशों के मुताबिक, यदि किसी मतदाता की ओर से एक से अधिक आवेदन किए जाने के कारण उसका नाम कई स्थानों पर दर्ज हो गया है, तो ऐसे मामलों की पहचान कर नियमानुसार उनका निस्तारण किया जाए। इसके लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
सपा ने 100 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची पर उठाए सवाल
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर समाजवादी पार्टी लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी ने 13 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की थी।
सपा का दावा है कि प्रदेश के 100 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें एक ही व्यक्ति का नाम दो, तीन और कुछ मामलों में 10 बार तक दर्ज था। पार्टी ने बूथवार उदाहरण देते हुए निर्वाचन आयोग से इन प्रविष्टियों की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।
इस मुद्दे पर सपा और निर्वाचन आयोग के बीच आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बना हुआ है। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना निर्वाचन अधिकारियों के लिए अहम चुनौती बन गया है।
BLO से लेकर निर्वाचन अधिकारियों तक तय होगी जिम्मेदारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट की हैं। बूथ लेवल अधिकारियों को संदिग्ध दोहरी प्रविष्टियों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। वहीं, बीएलओ सुपरवाइजर नियमित निगरानी करेंगे।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) को जांच और निस्तारण की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम अनावश्यक रूप से कई स्थानों पर दर्ज न रहे।
नवदीप रिणवा ने साफ किया कि इस काम में ढिलाई मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। जरूरत के मुताबिक उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
BLO को मिलेगा प्रशिक्षण, युवाओं और महिलाओं के नाम जोड़ने पर जोर
बैठक में ईआरओनेट एप में किए गए बदलावों की जानकारी बूथ लेवल अधिकारियों तक पहुंचाने और उन्हें जरूरी प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया। निर्वाचन आयोग की कोशिश है कि तकनीकी जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में कोई चूक न हो।
इसके साथ ही 24 अक्टूबर को आयोजित होने वाले विशेष अभियान में पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं, महिलाओं, दिव्यांगजनों और अन्य पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आगामी 12 नवंबर को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची को देखते हुए दोहरी प्रविष्टियों की जांच और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम महत्वपूर्ण हो गया है। अब यह देखना अहम होगा कि निर्वाचन अधिकारी तय समयसीमा में शिकायतों का निस्तारण कर मतदाता सूची को कितना त्रुटिरहित बना पाते हैं।









