लखनऊ/20 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश में विजयादशमी के पावन अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने इस पर्व को असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने सत्य, न्याय, मर्यादा और लोककल्याण के मूल्यों को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान बताया।
विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। भगवान श्रीराम और रावण से जुड़ी परंपराएं लोगों को याद दिलाती हैं कि शक्ति और अहंकार से ऊपर सत्य, नैतिकता और धर्म का स्थान है।
विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने सत्य और सदाचार पर दिया जोर
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विजयादशमी पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
उन्होंने इस अवसर को सत्य, न्याय, नैतिकता और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला बताया। विजयादशमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने आचरण और जिम्मेदारियों पर विचार करने का भी संदेश देती है।
राज्यपाल के संदेश का मूल भाव यही है कि समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने और न्यायपूर्ण व्यवहार अपनाने से ही सकारात्मक बदलाव संभव है।
सीएम योगी ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का किया स्मरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश देता है। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, न्याय, त्याग और लोककल्याण की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने इस पर्व को भारतीय संस्कृति में सत्य, न्याय और धर्म के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक बताया। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन से सीख लेते हुए अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहने और समाज तथा राष्ट्र के हित में काम करने की भावना पर जोर दिया।
भगवान श्रीराम का आदर्श जीवन व्यक्तिगत आचरण से लेकर सामाजिक दायित्वों तक, हर स्तर पर मर्यादा और कर्तव्य के महत्व को रेखांकित करता है। विजयादशमी का अवसर इन्हीं मूल्यों को फिर से याद करने और व्यवहार में उतारने की प्रेरणा देता है।
पंकज चौधरी ने कहा, अंत में सत्य और धर्म की होती है विजय
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी विजयादशमी के अवसर पर संदेश देते हुए कहा कि अन्याय और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।
उन्होंने पर्व के मूल संदेश को रेखांकित करते हुए सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े रहने की भावना पर जोर दिया। विजयादशमी की परंपरा भी यही बताती है कि गलत रास्ते पर चलने वाली शक्ति स्थायी नहीं होती।
धर्मपाल सिंह ने अहंकार और द्वेष त्यागने का किया आह्वान
भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने विजयादशमी को आत्ममंथन का अवसर बताया। उन्होंने लोगों से अहंकार, द्वेष और नकारात्मकता को त्यागने तथा समाज में सद्भाव और समरसता को मजबूत करने का आह्वान किया।
उनके संदेश में सामाजिक एकता और सकारात्मक सोच का महत्व सामने आया। त्योहारों की सार्थकता तभी बढ़ती है, जब उनके आदर्श लोगों के व्यवहार में भी दिखाई दें और समाज में आपसी सम्मान तथा सहयोग की भावना मजबूत हो।
विजयादशमी का संदेश: धर्म, मर्यादा और सामाजिक समरसता
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं के संदेशों में सत्य, न्याय, नैतिकता और सामाजिक सद्भाव पर विशेष जोर दिखाई दिया। विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम के आदर्शों के माध्यम से लोगों को अपने कर्तव्यों का पालन करने, बुराइयों से दूर रहने और समाज के हित में योगदान देने की प्रेरणा देता है।
भारतीय परंपरा में प्रचलित संस्कृत सूत्र ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ का भाव भी यही है कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। विजयादशमी का संदेश इसी विश्वास को दोहराता है कि सत्य, न्याय और सदाचार के रास्ते पर चलकर ही समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है।









