वाराणसी/21 अक्टूबर 2026। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में बुधवार को गंगा के ऊपर आसमान में भारतीय वायुसेना के शौर्य और कौशल की शानदार झलक देखने को मिली। नमो घाट पर प्रस्तावित वाराणसी एयर शो के पूर्वाभ्यास के दौरान तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे लड़ाकू विमानों की उड़ानों ने लोगों का ध्यान खींचा। सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने अपने करतबों से आसमान में तिरंगे की छटा बिखेरी। गंगा के घाट, देशभक्ति के गीत और विमानों की गर्जना ने इस पूर्वाभ्यास को खास बना दिया।
भारतीय वायुसेना का यह हवाई प्रदर्शन 22, 23 और 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है। बुधवार को हुए पूर्वाभ्यास ने मुख्य आयोजन की तैयारियों की झलक दिखाई। काशी जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर में इस तरह का आयोजन न केवल लोगों के लिए रोमांचक अनुभव है, बल्कि भारतीय वायुसेना की पेशेवर दक्षता और आधुनिक हवाई क्षमता को करीब से देखने का अवसर भी है।
वाराणसी एयर शो में तेजस की कलाबाजियां, सुखोई और राफेल का त्रिशूल फॉर्मेशन
नमो घाट पर हुए पूर्वाभ्यास का प्रमुख आकर्षण स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस रहा। आसमान में इसकी तेज उड़ान और हवाई करतबों ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। स्वदेशी तकनीक से विकसित इस विमान की मौजूदगी ने भारतीय विमानन क्षमता की झलक पेश की।
सुखोई-30 एमकेआई और राफेल की उड़ानों ने भी रोमांच बढ़ाया। दोनों विमानों के त्रिशूल फॉर्मेशन ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। इस तरह की हवाई संरचनाओं में पायलटों के बीच सटीक तालमेल, अनुशासन और समय का विशेष महत्व होता है।
गंगा के ऊपर विमानों की इन गतिविधियों के बीच घाटों पर मौजूद लोगों के लिए यह नजारा किसी यादगार अनुभव से कम नहीं रहा। हालांकि, बुधवार का कार्यक्रम पूर्वाभ्यास था और मुख्य प्रदर्शन में इसकी रूपरेखा के अनुसार बदलाव संभव है।
सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने आसमान में सजाए तिरंगे के रंग
वाराणसी एयर शो के पूर्वाभ्यास में सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। टीम के विमानों ने आसमान में सधे हुए करतब दिखाए और उनके पीछे निकलती केसरिया, सफेद तथा हरे रंग की धुएं की धारियों ने तिरंगे जैसी छटा पैदा की।
एक तरफ गंगा की धारा बह रही थी, तो दूसरी ओर आसमान में विमानों की कलाबाजियां दिखाई दे रही थीं। घाटों पर देशभक्ति के गीतों की गूंज ने माहौल को और जीवंत बना दिया। काशी की पहचान जहां मंदिरों, घाटों और आध्यात्मिक परंपराओं से है, वहीं इस आयोजन ने शहर को आधुनिक विमानन कौशल के एक अलग अनुभव से जोड़ा।
मिराज-2000 और जगुआर की उड़ानों ने याद दिलाए सैन्य अभियान
पूर्वाभ्यास में मिराज-2000 और जगुआर विमानों की भागीदारी ने भारतीय वायुसेना के ऐतिहासिक अभियानों की याद भी ताजा की।
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत हवाई अभियान चलाया था। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सैन्य कार्रवाई करना उस समय बड़ी चुनौती थी। मिराज-2000 और जगुआर सहित विभिन्न विमानों ने इस अभियान में हिस्सा लिया था।
वहीं, 26 फरवरी 2019 को बालाकोट में की गई हवाई कार्रवाई में मिराज-2000 विमानों ने अहम भूमिका निभाई थी। इस कार्रवाई को सार्वजनिक चर्चाओं में ऑपरेशन बंदर के नाम से भी जाना जाता है।
इन विमानों की मौजूदगी ने दर्शकों को भारतीय वायुसेना के परिचालन इतिहास और बदलती हवाई क्षमताओं की याद दिलाई।
विंटेज हार्वर्ड और चिनूक हेलीकॉप्टर भी रहे आकर्षण
वाराणसी एयर शो के पूर्वाभ्यास में पुराने विमानन इतिहास की झलक देने वाला हार्वर्ड विमान भी शामिल रहा। इस ऐतिहासिक प्रशिक्षण विमान ने अपने करतबों से दर्शकों का ध्यान खींचा।
इसके अलावा, चिनूक हेलीकॉप्टर की उड़ान भी आकर्षण का हिस्सा बनी। भारी सामान और सैनिकों के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले इस हेलीकॉप्टर की पहचान इसके आगे और पीछे लगे दो बड़े रोटरों से होती है। इसकी बनावट और उड़ान क्षमता इसे अन्य हेलीकॉप्टरों से अलग बनाती है।
छह लड़ाकू विमानों के एरोहेड फॉर्मेशन ने दिखाया तालमेल
पूर्वाभ्यास के दौरान छह लड़ाकू विमानों के एरोहेड फॉर्मेशन की भी चर्चा रही। इस संरचना में विमान तीर के अगले हिस्से जैसी आकृति बनाते हैं। प्रस्तावित प्रदर्शन में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 को शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है।
इस तरह के फॉर्मेशन में प्रत्येक पायलट को अपनी स्थिति, गति और दूसरे विमानों से दूरी का लगातार ध्यान रखना पड़ता है। छोटी-सी चूक भी जोखिम बढ़ा सकती है। यही वजह है कि ऐसे प्रदर्शन में अभ्यास, समन्वय और उड़ान अनुशासन की अहम भूमिका होती है।
22, 23 और 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है मुख्य हवाई प्रदर्शन
नमो घाट पर बुधवार को हुए पूर्वाभ्यास ने आने वाले मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों की झलक दिखाई। 22, 23 और 25 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन में लड़ाकू विमानों की उड़ानें, एरोबेटिक करतब और विभिन्न फॉर्मेशन प्रमुख आकर्षण रहने की उम्मीद है।
हालांकि, दर्शकों को कार्यक्रम में शामिल होने से पहले भारतीय वायुसेना और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की पुष्टि कर लेनी चाहिए। आयोजन के दौरान घाटों और आसपास की सड़कों पर भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए यातायात संबंधी निर्देशों का पालन करना भी जरूरी होगा।
काशी के इतिहास में जुड़ने जा रहा है एक नया अध्याय
काशी ने सदियों से अपनी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और गंगा के घाटों के कारण दुनिया भर में पहचान बनाई है। अब नमो घाट पर प्रस्तावित हवाई प्रदर्शन इस शहर को एक नए दृश्य अनुभव से जोड़ने जा रहा है।
बुधवार का पूर्वाभ्यास मुख्य आयोजन की एक झलक भर था। आने वाले दिनों में गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों की उड़ानें और सूर्यकिरण टीम के करतब काशी के लोगों के लिए यादगार बन सकते हैं। यह आयोजन भारतीय वायुसेना के साहस, प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता को सामने लाने के साथ देशभक्ति की भावना को भी मजबूत करने का अवसर होगा।










