लखनऊ/21 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस 2026 के अवसर पर कर्तव्य निभाते हुए प्राणों का बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बुधवार को लखनऊ की रिजर्व पुलिस लाइंस में आयोजित स्मृति परेड में उन्होंने प्रदेश के छह पुलिस एवं अग्निशमन कर्मियों के बलिदान को नमन किया। इनमें गौतमबुद्धनगर के दो अग्निशमनकर्मी और जालौन के चार पुलिसकर्मी शामिल हैं। शहीदों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ ऋण ऐसे होते हैं, जिन्हें कभी चुकाया नहीं जा सकता। शहीदों के प्रति राष्ट्र का ऋण भी ऐसा ही है। देश की सुरक्षा, समाज में शांति और नागरिकों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों का त्याग हमेशा याद रखा जाएगा।
पुलिस स्मृति दिवस 2026: छह बलिदानियों को सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि
हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस उन पुलिसकर्मियों की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद जवानों के साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को याद करते हुए कहा कि उनके बलिदान से देशवासियों को अपने दायित्वों का बोध होता है।
उन्होंने कहा कि शहीदों को याद करते समय मन श्रद्धा और सम्मान से भर उठता है। उनके साहस पर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा होता है। किसी भी राष्ट्र की महानता इस बात से भी तय होती है कि वह अपने इतिहास, मूल्यों और उन लोगों के योगदान को कितना सम्मान देता है, जिनके त्याग से वर्तमान सुरक्षित और भविष्य बेहतर बनता है।
ग्रेटर नोएडा की कंपनी में आग बुझाते समय शहीद हुए दो अग्निशमनकर्मी
गौतमबुद्धनगर के फायर सर्विस चालक तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव ने चार अगस्त 2026 को ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई थी। दोनों ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-3 क्षेत्र स्थित ईलजिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में लगी आग बुझाने पहुंचे थे।
रात करीब 3:28 बजे आग लगने की सूचना मिलने के बाद अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने की कोशिश के दौरान कंपनी की दीवार अचानक ढह गई और अग्निशमन वाहनों पर गिर पड़ी। मलबे में दबने से तीर्थपाल सिंह और रोहित यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल में उपचार के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई।
कर्तव्य के दौरान हुए इस हादसे ने अग्निशमन कर्मियों के जोखिम भरे काम और लोगों की सुरक्षा के लिए उनके समर्पण को एक बार फिर सामने रखा।
अपहृत व्यक्ति को बचाने निकले थे जालौन के चार पुलिसकर्मी
पुलिस स्मृति दिवस पर जालौन जिले के उन चार पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिनकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। पांच मई 2026 को उरई कोतवाली में अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। अपहृत व्यक्ति की सकुशल बरामदगी के लिए उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, सिपाही अशोक कुमार और सिपाही प्रदीप कुमार रवाना हुए थे।
हरियाणा के नूंह जिले में तावड़ू क्षेत्र के धुलावट टोल प्लाजा के पास उनकी स्कॉर्पियो आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। इस दुर्घटना में चारों पुलिसकर्मियों की जान चली गई। मुख्यमंत्री ने इन सभी बलिदानियों को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया।
‘शहीदों का बलिदान हमें अपने दायित्वों का बोध कराता है’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शहीद पुलिसकर्मियों का बलिदान केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और शासन को अपने कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए जान देने वाले जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना पूरे राष्ट्र का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों के त्याग से देश का वर्तमान सुरक्षित है, उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। शहीदों के परिवारों का सम्मान और उनके प्रति संवेदनशीलता भी इस कृतज्ञता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पिछली व्यवस्था पर निशाना, कानून-व्यवस्था को लेकर कही यह बात
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पिछली व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि एक समय ऐसा था, जब पुलिस अधिकारी किसी अपराधी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले राजनीतिक दबाव के बारे में सोचने को मजबूर होते थे। उनके मुताबिक, अपराधियों पर हाथ डालने के बाद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने की स्थिति भी बन जाती थी।
सीएम योगी ने कहा कि उस दौर में पुलिसकर्मियों को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय दूसरे दबावों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने पुराने पुलिस थानों की जर्जर बैरकों, सुविधाओं की कमी और पीएसी कंपनियों को बंद करने की कथित कोशिशों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले अपराधी खुलेआम हथियार लहराते थे, जबकि पुलिसकर्मी सीमित संसाधनों के बीच काम करने को मजबूर थे। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सरकार की नीति का बचाव करते हुए विपक्षी आलोचकों पर भी सवाल उठाए।
उनका कहना था कि जो लोग पुलिस कार्रवाई और मुठभेड़ों को लेकर सवाल उठाते हैं, उन्हें उन परिवारों के दर्द को भी समझना चाहिए, जिन्होंने अपराधियों की गोलियों से अपने प्रियजनों को खोया है। शहीद जवानों के बच्चों और परिजनों के प्रति संवेदना तथा सहायता भी उतनी ही जरूरी है।
पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करने का दिन
पुलिस स्मृति दिवस उन जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की सुरक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शहीदों को नमन किया और उनके परिजनों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि वर्दी में निभाया गया कर्तव्य केवल नौकरी नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी है। शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को साहस, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा।








