कानपुर, 22 अक्टूबर 2026। स्वरूपनगर स्थित राजकीय बालिकागृह में गुरुवार को बच्चियों के हुनर और उनके सपनों से रूबरू हुईं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने उनके बनाए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चियों की कलाकारी को पहचान मिलनी चाहिए और उनके हुनर को आत्मनिर्भरता का जरिया बनाया जाना चाहिए। राज्यपाल ने उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली रकम सीधे बच्चियों के बैंक खातों में जमा कराने की व्यवस्था करने को भी कहा।
राजकीय बालिकागृह में बच्चियों के हुनर ने जीता राज्यपाल का दिल
राजकीय बालिकागृह के दौरे के दौरान बच्चियों ने अपने हाथों से तैयार की गई राखियां, कुशन, क्राफ्ट और ग्लास पर बनाई गई पेंटिंग राज्यपाल को दिखाईं। इन कलाकृतियों को देखकर वह काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने बच्चियों से बातचीत करते हुए पूछा कि उन्होंने अब तक क्या-क्या सीखा है और इन कामों को सीखने का अवसर उन्हें कैसे मिला।
बच्चियों ने अपने बनाए उत्पाद दिखाकर अपनी कला और हुनर का परिचय दिया। इस पर राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन उत्पादों की बिक्री के लिए उचित बाजार उपलब्ध कराया जाए। इससे बच्चियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मदद मिल सकेगी।
उत्पादों की कमाई सीधे बच्चियों के बैंक खातों में जमा कराने के निर्देश
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बच्चियों के हुनर को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार और कमाई से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए जरूरी व्यवस्था की जाए और बच्चियों के बैंक खाते खुलवाए जाएं, ताकि बिक्री से होने वाली आय सीधे उनके खातों में जमा हो सके।
इस पहल का उद्देश्य बच्चियों को अपने हुनर की आर्थिक अहमियत समझाना और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। हस्तनिर्मित उत्पादों को बाजार मिलने से उनके भीतर रचनात्मकता के साथ कामकाजी कौशल विकसित करने का अवसर भी मिलेगा।
इच्छुक बच्चियों को नर्सिंग का कोर्स कराने पर जोर
राज्यपाल ने बालिकागृह में रह रहीं बच्चियों की शिक्षा और भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने इच्छुक बच्चियों को नर्सिंग का कोर्स कराने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय पाठक से कहा।
इसके साथ ही उन्होंने बच्चियों को कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि बच्चियों को ऐसी शिक्षा और प्रशिक्षण मिले, जिससे वे आगे चलकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और अपने भविष्य के फैसले आत्मविश्वास के साथ ले सकें।
‘हम भी राजभवन देखना चाहते हैं’, बच्चियों की इच्छा पर राज्यपाल ने दिए निर्देश
दौरे के दौरान बच्चियों ने राज्यपाल के सामने अपनी एक खास इच्छा भी रखी। उन्होंने कहा, ”मैम, हम भी राजभवन देखना चाहते हैं, हमें भी घुमा दीजिए।” बच्चियों की इस बात पर राज्यपाल ने अधिकारियों को उन्हें राजभवन घुमाने की तैयारी कराने के निर्देश दिए।
राज्यपाल करीब एक घंटे तक बालिकागृह में रहीं। इस दौरान उन्होंने बच्चियों से संवाद किया और उनकी पढ़ाई, प्रशिक्षण तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। बच्चियों की इच्छा पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए उन्होंने उनके लिए राजभवन भ्रमण की व्यवस्था करने को कहा।
रसोई से चिकित्सा कक्ष तक व्यवस्थाओं का निरीक्षण
राज्यपाल ने बालिकागृह के हॉल, कमरों, रसोई और चिकित्सा कक्ष का निरीक्षण भी किया। उन्होंने बच्चियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता देखी और उनसे यहां मिलने वाली सुविधाओं तथा पढ़ाई के संबंध में जानकारी ली।
इस अवसर पर राज्यपाल ने बच्चियों को ट्रैक सूट, फल और मिठाई की टोकरियां भी भेंट कीं। दौरे के दौरान बच्चियों की देखभाल, शिक्षा और उनके भविष्य को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया गया।
कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
राजकीय बालिकागृह के इस दौरे के दौरान कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय, पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल, जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता और हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) के कुलपति प्रो. शमशेर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
राज्यपाल के इस दौरे में बच्चियों की शिक्षा, कौशल विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य के अवसरों पर विशेष जोर दिया गया।









