नई दिल्ली/25 अक्टूबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ ने 12 साल का सफर पूरा कर लिया है। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को कार्यक्रम के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को देशवासियों के प्रयासों, समर्पण और सेवा भावना को समझने वाली एक पवित्र तीर्थयात्रा बताया। उन्होंने कहा कि इस मंच के जरिए उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे ऐसे लोगों के बारे में जानने का अवसर मिला, जो अपने छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव ला रहे हैं।
पीएम मोदी ने इस सफर में साथ देने वाले श्रोताओं का आभार जताते हुए कहा कि ‘मन की बात’ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश के सामान्य नागरिकों के असाधारण योगदान को सम्मान देने का अवसर भी है।
मन की बात के 12 साल: विजयादशमी से शुरू हुआ सफर
प्रधानमंत्री ने याद किया कि ‘मन की बात’ की शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। तब से यह कार्यक्रम लगातार लोगों तक पहुंचता रहा है। उन्होंने श्रोताओं को इस यात्रा का सहयात्री और मार्गदर्शक बताते हुए उनके योगदान की सराहना की।
पीएम मोदी के मुताबिक, देश में तीर्थयात्राओं की सदियों पुरानी परंपरा रही है। उनके लिए ‘मन की बात’ भी कुछ ऐसी ही यात्रा है, जिसमें देशवासियों के परिश्रम, साहस, सेवा और समर्पण को जानने तथा उन्हें नमन करने का अवसर मिलता है।
दिवाली और छठ से पहले स्वच्छता पर जोर
त्योहारों के मौसम को देखते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने घरों के साथ-साथ आसपास की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि दिवाली और छठ जैसे पर्व नजदीक हैं और कई स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं।
त्योहारों के दौरान बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रशासन के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि स्वच्छता को केवल किसी विशेष अभियान तक सीमित न रखें, बल्कि इसे रोजमर्रा की आदत बनाएं।
‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की अपील
पीएम मोदी ने दिवाली पर स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों के बनाए उत्पाद खरीदने का आह्वान किया। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।
स्थानीय उत्पादों की खरीद से कारीगरों, बुनकरों, छोटे उद्यमियों और ग्रामीण उत्पादकों को बाजार मिलता है। त्योहारों के समय खरीदारी का यह निर्णय उनके रोजगार और आजीविका को सहारा दे सकता है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय उत्पादों की विदेशों में बढ़ती मांग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बिहार के मखाने, कर्नाटक की अरहर दाल और महाराष्ट्र के जनजातीय उत्पादों का उदाहरण देते हुए खादी की लोकप्रियता बढ़ने की बात कही।
प्रकृति और जल स्रोतों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री ने भारत की प्रकृति-पूजा की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि अपने परिवेश को स्वच्छ रखना और जल स्रोतों की देखभाल करना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने छोटे-छोटे सामूहिक प्रयासों की ताकत को रेखांकित किया।
जल संरक्षण आज ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के लिए अहम विषय है। वर्षा जल का संचयन, पेड़ लगाना और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाना ऐसे कदम हैं, जिनका लाभ लंबे समय तक मिल सकता है। पीएम मोदी ने इसी भावना के साथ लोगों से पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाने की अपील की।
उत्तराखंड में हेवल नदी को फिर से जीवित करने की सराहना
‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी के पुनर्जीवन के लिए ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने इसे प्रकृति संरक्षण और जनभागीदारी की मिसाल बताया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, एक समय हेवल नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया था। आसपास के कई प्राकृतिक जल स्रोत भी सूखने लगे थे। इस स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन ने मिलकर नदी को बचाने की मुहिम शुरू की।
इस प्रयास में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैसे उपाय अपनाए गए। पीएम मोदी ने बताया कि इन सामूहिक प्रयासों से नदी को नया जीवन मिला और कई प्राकृतिक जल स्रोत भी दोबारा सक्रिय हुए।
यह उदाहरण बताता है कि जल संरक्षण के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय लोगों की भागीदारी, निरंतर प्रयास और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
पंजाब की नव-त्रिंजन पहल का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती से जुड़ी नव-त्रिंजन पहल की भी सराहना की। इस पहल का उल्लेख रासायनिक रंगों के बिना प्राकृतिक कपास उगाने के संदर्भ में किया गया।
ऐसी पहलों के जरिए पारंपरिक कौशल, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने की संभावनाएं सामने आती हैं। प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में लोगों द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए सामूहिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव का संदेश
‘मन की बात’ के 12 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री का संदेश समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले आम लोगों के योगदान पर केंद्रित रहा। स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन, पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों का पुनर्जीवन जैसे विषयों के जरिए उन्होंने नागरिक भागीदारी की अहमियत बताई।
त्योहारों के इस दौर में उनका संदेश साफ है—स्थानीय कारीगरों से खरीदारी करना हो या अपने आसपास सफाई रखना, छोटे कदम भी व्यापक सामाजिक बदलाव की नींव बन सकते हैं। वहीं, हेवल नदी जैसी पहलें दिखाती हैं कि जब समुदाय किसी साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होता है, तो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।











