नई दिल्ली/25 अक्टूबर 2026: फ्लाइट टिकट कैंसिल होने पर किराया वापस मिलने के नियमों के बीच जीएसटी (GST) रिफंड को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सामने आया है। जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) की एर्नाकुलम बेंच ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित शर्तें पूरी होने और जरूरी दस्तावेजों से यात्रियों को रिफंड दिए जाने की पुष्टि होने पर एयरलाइन टिकटों पर जमा जीएसटी की वापसी का दावा कर सकती है।
यह फैसला सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड बनाम कोच्चि CGST एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त मामले में आया। इसका संबंध कोविड-19 महामारी के दौरान रद्द हुई उड़ानों और यात्रियों को किराये सहित टैक्स लौटाने से है। हालांकि, इस फैसले को यात्रियों के लिए हर फ्लाइट कैंसिलेशन पर लागू होने वाला स्वतः रिफंड नियम नहीं समझना चाहिए। यह मामला मुख्य रूप से एयरलाइन के जीएसटी रिफंड दावे से जुड़ा है।
फ्लाइट टिकट कैंसिल होने पर GST रिफंड: ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?
जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की एर्नाकुलम बेंच ने माना कि यदि एयरलाइन यात्रियों को किराये और जीएसटी सहित पूरी रकम वापस कर देती है और इसके पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत करती है, तो वह संबंधित टैक्स की वापसी की हकदार हो सकती है।
ट्रिब्यूनल के सामने यह सवाल था कि जब उड़ान रद्द होने के बाद यात्रियों को पूरा पैसा लौटा दिया गया, तो एयरलाइन द्वारा सरकार के पास जमा कराए गए जीएसटी का क्या होगा। मामले में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ट्रिब्यूनल ने पाया कि रिफंड वास्तविक यात्रियों तक पहुंचा था और टैक्स का बोझ किसी दूसरे व्यक्ति पर नहीं डाला गया था।
आदेश के अनुसार, राजस्व विभाग को सिंगापुर एयरलाइंस के रिफंड दावे पर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने और ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया गया।
₹45.92 लाख के आठ रिफंड दावों से जुड़ा मामला
यह विवाद अक्टूबर 2019 से मार्च 2021 के बीच दाखिल जीएसटी रिफंड के आठ दावों से संबंधित था। इन दावों की कुल राशि ₹45.92 लाख बताई गई है।
कोविड-19 महामारी के दौरान सिंगापुर एयरलाइंस ने कई उड़ानें रद्द की थीं। कंपनी ने प्रभावित यात्रियों को जीएसटी सहित पूरा किराया लौटा दिया, लेकिन टैक्स से संबंधित क्रेडिट नोट्स को अपने आउटपुट टैक्स दायित्व के विरुद्ध समायोजित नहीं कर सकी।
इसके बाद जीएसटी के संयुक्त आयुक्त ने एयरलाइन के रिफंड दावों को खारिज कर दिया। एयरलाइन ने इस निर्णय को चुनौती दी और मामला जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल तक पहुंचा। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 16 अक्टूबर को दिए गए आदेश में ट्रिब्यूनल ने पहले के निर्णय को पलट दिया।
एयरलाइन को GST रिफंड क्यों मिला?
ट्रिब्यूनल के फैसले में यात्रियों को वास्तव में पैसा लौटाए जाने और टैक्स का आर्थिक बोझ किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं पड़ने के तथ्य महत्वपूर्ण रहे।
इस मामले में प्रमुख बिंदु थे:
- पूरा रिफंड: यात्रियों को किराये के साथ जीएसटी की रकम भी लौटाई गई थी।
- दस्तावेजी प्रमाण: एयरलाइन ने रिफंड से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत किए।
- टैक्स का बोझ: उपलब्ध साक्ष्यों से यह निष्कर्ष निकला कि टैक्स का बोझ किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं डाला गया था।
- रिफंड का निर्देश: ट्रिब्यूनल ने संबंधित विभाग को दावे पर कार्रवाई कर ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया।
यहां ध्यान देना जरूरी है कि जीएसटी रिफंड का दावा और यात्रियों को टिकट का पैसा लौटाने का अधिकार दो अलग-अलग विषय हैं। ट्रिब्यूनल का यह निर्णय एयरलाइन के टैक्स रिफंड विवाद पर केंद्रित था।
क्या फ्लाइट टिकट कैंसिल होने पर यात्रियों को GST सहित पूरा पैसा मिलता है?
यात्रियों को टिकट रद्द होने पर कितना पैसा मिलेगा, यह उड़ान रद्द होने की वजह, टिकट की शर्तों और लागू विमानन नियमों पर निर्भर करता है। यदि एयरलाइन स्वयं उड़ान रद्द करती है, तो यात्रियों के लिए लागू नियमों के अनुसार रिफंड या वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था हो सकती है। वहीं, यात्री अपनी ओर से टिकट कैंसिल करता है, तो किराये की वापसी टिकट की शर्तों और लागू नियमों के अनुसार तय होती है।
इसलिए सिंगापुर एयरलाइंस से जुड़े फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हर यात्री को प्रत्येक कैंसिल टिकट पर बिना किसी कटौती के पूरा किराया और जीएसटी वापस मिलेगा। यह फैसला मुख्य रूप से उस स्थिति से संबंधित है जिसमें एयरलाइन पहले ही यात्रियों को रकम लौटा चुकी थी और अब सरकार से जमा जीएसटी वापस मांग रही थी।
यात्रियों के लिए इस फैसले का क्या महत्व है?
यह फैसला रिफंड प्रक्रिया में पारदर्शिता और टैक्स के सही हिसाब-किताब के महत्व को रेखांकित करता है। एयरलाइन को यात्रियों को पैसा लौटाने और सरकार से टैक्स वापसी का दावा करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पड़ सकते हैं।
यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि टिकट बुक करते समय कैंसिलेशन की शर्तें पढ़ें, रिफंड की रसीद और ईमेल संभालकर रखें तथा उड़ान रद्द होने की स्थिति में एयरलाइन से लिखित जानकारी लें। यदि रिफंड नहीं मिलता है, तो लागू नियमों के अनुसार संबंधित शिकायत निवारण माध्यम का सहारा लिया जा सकता है।
कुल मिलाकर, GSTAT का यह फैसला एयरलाइन के जीएसटी रिफंड दावे से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है। इसे यात्रियों के हर टिकट कैंसिलेशन पर लागू होने वाले सार्वभौमिक रिफंड नियम के रूप में देखना सही नहीं होगा।












