आगरा/27 अक्टूबर 2026। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों में विषयों को समझने, सवाल पूछने और नई चीजें सीखने की क्षमता विकसित करना भी है। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शिक्षकों से पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ने की अपील की। आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े विमर्श और कार्यक्रम बड़े विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इन्हें गांवों और उन क्षेत्रों तक भी पहुंचाना जरूरी है, जहां शैक्षिक जागरूकता की अधिक आवश्यकता है।
राज्यपाल ने बच्चों को रटाने के बजाय उनकी बुनियादी समझ मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षकों की उपलब्धता, नियुक्तियों में पारदर्शिता और स्कूलों में अनुशासन जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।
अंकों से आगे बढ़कर बच्चों की समझ विकसित करें शिक्षक
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि बच्चों को केवल पाठ याद करा देना शिक्षा का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकता। जरूरी यह है कि वे पढ़ाई में बताई गई बातों को समझें और उनका इस्तेमाल वास्तविक जीवन में कर सकें।
उन्होंने अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा में अंकों की पहचान और बुनियादी अवधारणाओं को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि नींव मजबूत होगी, तो आगे की पढ़ाई में भी बच्चों को मदद मिलेगी।
शिक्षा के क्षेत्र में यह सवाल लगातार अहम बना हुआ है कि बच्चों का मूल्यांकन केवल परीक्षा के अंकों से किया जाए या उनकी समझ, तर्क करने की क्षमता और सीखने के तरीके को भी महत्व मिले। राज्यपाल का संदेश इसी व्यापक विचार की ओर ध्यान दिलाता है कि बेहतर शिक्षा के लिए रटने के साथ-साथ समझने और सीखने की आदत विकसित करना जरूरी है।
बड़े विश्वविद्यालयों से निकलकर गांवों तक पहुंचे शिक्षा का विमर्श
सम्मेलन में राज्यपाल ने शिक्षा से संबंधित कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर चर्चा केवल बड़े विश्वविद्यालयों की चारदीवारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ऐसे आयोजन उन क्षेत्रों में भी होने चाहिए, जहां उनके माध्यम से लोगों की सोच में बदलाव लाया जा सके।
उन्होंने बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में सम्मेलन आयोजित करने के विकल्पों के बीच उन्होंने आगरा को चुना। साथ ही, कानपुर देहात जैसे क्षेत्रों में भी शिक्षा से संबंधित कार्यक्रम आयोजित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही।
इस विचार के पीछे उद्देश्य शिक्षा से जुड़े संवाद को व्यापक बनाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों तक शैक्षिक जागरूकता पहुंचने से स्थानीय जरूरतों और चुनौतियों पर भी चर्चा की गुंजाइश बनती है।
गुजरात में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती का किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान आनंदीबेन पटेल ने गुजरात में अपने कार्यकाल का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कक्षाओं में शिक्षकों की कमी देखी, तब लगभग 20 हजार शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कराई गई। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में योग्यता और मेरिट को प्राथमिकता दी गई।
राज्यपाल ने नियुक्तियों में पारदर्शिता को जरूरी बताते हुए कहा कि शिक्षकों का चयन किसी की सिफारिश या दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी योग्यता के अनुसार होना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएं, विषयों पर बेहतर मार्गदर्शन और सीखने के अधिक अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, भर्ती की संख्या और प्रक्रिया से संबंधित विवरणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
शिक्षकों के तबादलों और नकल रोकने पर भी रखे विचार
राज्यपाल ने गुजरात में शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात शिक्षकों के स्थानांतरण पर ध्यान दिया गया, जबकि अन्य शिक्षकों को अनावश्यक रूप से स्थानांतरित नहीं करने की नीति अपनाई गई।
उनके मुताबिक, इस फैसले का कुछ शिक्षक संगठनों ने विरोध किया, लेकिन उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से अपनी नीति जारी रखी।
उन्होंने ट्यूशन व्यवस्था पर नियंत्रण और परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए नियम लागू कराने के प्रयासों का भी जिक्र किया। उनका संदेश था कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नियमों का पालन, पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी हैं।
जनहित में फैसले लेने के लिए जरूरी है दृढ़ता
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में काम करते समय विरोध का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन किसी निर्णय की उपयोगिता को उसके उद्देश्य और जनहित के आधार पर भी देखा जाना चाहिए।
शिक्षा के संदर्भ में उनका संदेश स्पष्ट रहा—बच्चों की बुनियादी समझ मजबूत करना, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को जरूरतमंद क्षेत्रों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
आगरा में आयोजित इस सम्मेलन के जरिए शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के सामने पढ़ाई की गुणवत्ता, ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक पहुंच और संस्थागत सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। अब इन विचारों को स्कूलों और कक्षाओं में किस तरह लागू किया जाता है, यह शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगा।









