लखनऊ (रविवार, 8 नवंबर 2026)। उत्तर प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों और बिना लाइसेंस संचालित क्लीनिकों पर रोक लगाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में अयोग्य चिकित्सकों और अवैध क्लीनिकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।
झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश तुलसा देवी सेवा संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में अयोग्य चिकित्सक और बिना लाइसेंस के क्लीनिक संचालित हो रहे हैं।
याची संस्थान ने अदालत से ऐसे डॉक्टरों और क्लीनिकों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है। साथ ही लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने और अवैध चिकित्सा गतिविधियों से आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
अवैध क्लीनिकों से लोगों की जान को खतरा
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि झोलाछाप डॉक्टरों और बिना लाइसेंस वाले क्लीनिकों की बढ़ती संख्या लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है। इन पर रोकथाम के प्रभावी इंतजाम नहीं होने के कारण मरीजों को नुकसान उठाना पड़ रहा है और कई मामलों में जान तक गंवानी पड़ रही है।
संस्थान का कहना है कि लोगों की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से चिकित्सा सेवाएं दे रहे व्यक्तियों और क्लीनिकों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई जरूरी है।
10 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील के साथ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से अधिवक्ता भी अदालत में पेश हुए। हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने इस जनहित याचिका को इसी तरह के एक अन्य लंबित मामले के साथ संबद्ध कर पेश करने का भी आदेश दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को निर्धारित की गई है।









