वाराणसी, 31 अक्टूबर 2025। काशी नगरी में शुक्रवार को उस समय ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की उपस्थिति में काशी नाटकोट्टई नगर क्षेत्रम धर्मशाला का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने काशी और तमिलनाडु के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा, “संस्कृत और तमिल भारत की आत्मा हैं। भाषाएं अलग हो सकती हैं, पर भारत की आत्मा एक ही है — शाश्वत, समावेशी और अटूट।”
‘वनक्कम काशी’: भाषाई विविधता में एकता का संदेश
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण की शुरुआत “वनक्कम काशी” कहकर की, जिससे पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
उन्होंने कहा कि गंगा और कावेरी, काशी और मदुरै, संस्कृत और तमिल — ये सभी भारत की उसी अविचल सांस्कृतिक धारा के प्रतीक हैं, जिसने उत्तर से दक्षिण तक सबको जोड़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “काशी और तमिलनाडु का रिश्ता केवल तीर्थों का नहीं, बल्कि आत्मा का संबंध है।”
धर्मशाला बनेगी उत्तर-दक्षिण एकता का सेतु
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन द्वारा उद्घाटित इस धर्मशाला का निर्माण श्रीकाशी नाटकोट्टई नगर क्षेत्रम मैनेजिंग सोसाइटी द्वारा कराया गया है।
यह श्रद्धालुओं को ठहरने की आधुनिक सुविधा तो देगा ही, साथ ही उत्तर और दक्षिण भारत के बीच Kashi Tamil Cultural Unity को भी और सुदृढ़ करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थान “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मूर्त रूप देगा।
‘विश्वेश्वर और रामेश्वर एक ही चेतना के प्रतीक’
योगी ने कहा कि भगवान श्रीराम द्वारा रामेश्वरम में स्थापित पावन ज्योतिर्लिंग और काशी के भगवान विश्वेश्वर — दोनों एक ही दिव्य चेतना के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा, “भगवान शिव और भगवान राम के माध्यम से जो संबंध बना, उसे आदि शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में पीठ स्थापित कर आगे बढ़ाया। काशी ने उन्हें आत्मज्ञान दिया और उन्होंने देश को आत्मबोध दिया।”
यह परंपरा, योगी के अनुसार, भारत को संतुलन, विवेक और समरसता का संदेश देती है।
‘तेनकाशी – दक्षिण की काशी’
मुख्यमंत्री ने बताया कि तमिलनाडु की तेनकाशी को “दक्षिण की काशी” कहा जाता है, जहां भगवान विश्वनाथ का प्राचीन मंदिर स्थित है।
उन्होंने कहा कि यह गौरवशाली परंपरा आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और भी सशक्त हुई है।
“प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में देश की आस्था और संस्कृति के पुनर्जागरण का कार्य नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है,” योगी ने कहा।
‘संस्कृत और तमिल दोनों भारत की आत्मा हैं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति के सभी तत्व काशी और तमिलनाडु दोनों में समान रूप से सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा, “संस्कृत और तमिल, दोनों भारत की सबसे प्राचीन भाषाएं हैं। इनसे ही भारतीय साहित्य और विचार का मूल निकला है। ये हमारी सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक हैं।”
योगी ने बताया कि यह समावेशी सांस्कृतिक प्रेरणा समाज में सद्भाव, एकता और आत्मगौरव को पोषित करती है।
अयोध्या धाम में तमिल संतों की विरासत का सम्मान
मुख्यमंत्री ने बताया कि अयोध्या में तमिल संतों की स्मृति में चारों प्रमुख द्वारों का नामकरण किया गया है —
जगद्गुरू शंकराचार्य, जगद्गुरू रामानुजाचार्य, जगद्गुरू रामानंदाचार्य और जगद्गुरू माधवाचार्य के नाम पर।
उन्होंने कहा कि हाल ही में अयोध्या में तमिल संत त्यागराज स्वामी, पुरंदरदास स्वामी और अरुणाचल कवि की प्रतिमाओं की स्थापना केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ की गई।
“यह उत्तर-दक्षिण एकता के अमर सूत्र को और मजबूत करने वाला कदम है,” योगी ने कहा।
‘काशी में विकास और आस्था का संगम’
सीएम योगी ने बताया कि हाल के वर्षों में 51 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं काशी में स्वीकृत हुई हैं, जिनमें से 34 हजार करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण हो चुका है और 16 हजार करोड़ की परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से काशी में रोड, रेल, एयर और जलमार्ग की कनेक्टिविटी अभूतपूर्व स्तर पर पहुंची है। जल्द ही अर्बन रोपवे की सौगात मिलने वाली है।”
यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देगी।
अनेक गणमान्यों की उपस्थिति
कार्यक्रम में तमिलनाडु सरकार के मंत्री एस. रघुपति, यूपी सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल, श्रीकाशी नाटकोट्टई के अध्यक्ष एल. नारायणन, अभिरामी रामानाथन, एम.ई. एम.आर. मुथाई, एस. कदिरेसन, डॉ. सोलार नचित्तन, डॉ. नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, अशोक तिवारी, और धर्मेंद्र सिंह समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।








