राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

Dev Deepawali Varanasi: सीएम योगी ने नमो घाट से किया देव दीपावली का शुभारंभ, गंगा घाटों पर जगमगाए लाखों दीप

On: November 5, 2025
Follow Us:
Dev Deepawali Varanasi: सीएम योगी ने नमो घाट से किया देव दीपावली का शुभारंभ
---Advertisement---

वाराणसी, 05 नवंबर 2025 (बुधवार)। काशी नगरी में देवताओं का त्यौहार माना जाने वाला देव दीपावली एक बार फिर आस्था के अनूठे नज़ारे को जीवंत कर गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज नमो घाट पर पहला दीप प्रज्वलित कर इस दिव्य उत्सव का शुभारंभ किया। देखते ही देखते गंगा के तट और काशी के सभी घाट लाखों दीपों की रोशनी में झिलमिलाने लगे। हर तरफ केवल एक ही अनुभूति—अद्भुत आस्था, अनंत प्रकाश और गहरी सांस्कृतिक आभा की।

दीपों की रोशनी में काशी बना ‘प्रकाश नगरी’

मुख्यमंत्री ने शक्तिपूर्वक गंगा पूजन के साथ जैसे ही पहला दीप जलाया, वैसे ही काशी की 88 घाटों पर असंख्य दीप सहसा जगमगा उठे। गंगा की लहरों पर टिमटिमाते दीप मानो तारों की नदी बहा रहे हों। ऐसा दृश्य कि लगे, देवताएँ खुद इस दिव्य पर्व पर उतर आई हों।

उत्सव का खास आकर्षण—नमो घाट से दिखने वाला वह नज़ारा था, जहाँ गंगा आरती की ध्वनि, कपूर की लौ, और जगमग दीप-सरिता मिलकर प्रतीत होती थीं जैसे आत्मा को प्रकाश से जोड़ रही हों। इसके साथ शिवाला घाट पर हुआ भव्य लेजर शो आधुनिकता और अध्यात्म का अनोखा संगम पेश कर रहा था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्रूज से देखा दिव्य नज़ारा

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने नमो घाट से विशिष्ट अतिथियों के साथ क्रूज पर सवार होकर गंगा तट के हर घाट पर आयोजित हो रहे कार्यक्रमों का अवलोकन किया। इस दौरान उनके साथ प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल, डीएम, पुलिस कमिश्नर सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

सीएम योगी ने कहा, “देव दीपावली केवल दीपों का त्यौहार नहीं, बल्कि यह काशी की समग्र आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जो पूरे विश्व को भारत की वैभवशाली परंपरा का संदेश देता है।”

देव दीपावली का पौराणिक महत्व

देव दीपावली का मनाया जाना भगवान शिव द्वारा राक्षस त्रिपुरासुर के वध के उपलक्ष्य में होता है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं ने काशी में उतरकर गंगा तट पर दीप जलाकर इस दिव्य विजय का उत्सव मनाया था।

पौराणिक कथा के अनुसार—अमर किलों के स्वामी त्रिपुरासुर को हराने के बाद, शिव ने देवताओं की रक्षा की। इसी विजय के उपलक्ष्य में दीपों से सजा यह पर्व आज भी शिव की करुणा, उनकी शक्ति और धर्म की विजय का स्मरण कराता है।

शहीदों को भी दी जाती है श्रद्धांजलि

देव दीपावली केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावना से भी ओतप्रोत है। हर साल की भांति इस वर्ष भी भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना, और NCC के जवानों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। घाटों पर ‘आकाशदीप’ जलाकर उन वीरों की याद को अक्षय किया गया, जिनकी बहादुरी ने देश को सुरक्षित रखा।

कालातीत परंपरा और आधुनिक नज़रिया

ऋषि नारद से लेकर अहिल्याबाई होल्कर और अब मुख्यमंत्री योगी तक—हर काल की देव दीपावली अपनी सादगी और अपने भावों में अद्वितीय रहती है। लेजर शो, सजी हुई नावें, आग के करतब दिखाते कलाकार, और संगीत-मंचों पर प्रदर्शन करते कलाकार—सब मिला-जुला कर काशी को इस रात सचमुच ‘देवों की नगरी’ बना देते हैं।

उत्सव के इस क्षण में गंगा घाट प्रतीत होते हैं जैसे कालातीत आस्था का प्रतिबिंब हो—जहाँ दीपों की अनगिनत लौएं मिलकर कह रही हों, “अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो—प्रकाश उसका अंत कर ही देता है।”

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now