मेरठ | 22 जनवरी 2026 (गुरुवार): मेरठ में बन रहे मेजर ध्यानचंद राजकीय खेल विश्वविद्यालय को अब 10 एकड़ अतिरिक्त जमीन मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय परिसर के निरीक्षण के बाद यह घोषणा की। पहले इस विश्वविद्यालय के लिए 90 एकड़ भूमि आवंटित थी, जो अब बढ़कर कुल 100 एकड़ हो जाएगी। अतिरिक्त जमीन पर नई खेल सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि इसे विश्वस्तरीय खेल शिक्षा और प्रशिक्षण का केंद्र बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की शुरुआत 15 खेलों से होगी और चरणबद्ध तरीके से सभी ओलंपिक खेलों को इसमें शामिल किया जाएगा। इस योजना के साथ एक हाई परफॉर्मेंस सेंटर स्थापित करने की भी रूपरेखा रखी गई है, जहां खेल विज्ञान (Sports Sciences) से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
15 खेलों से शुरुआत, आधुनिक बुनियादी ढांचा
प्रारंभिक चरण में जिन खेलों की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, उनमें एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक, हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ, फुटबॉल मैदान, लॉन टेनिस, कुश्ती, भारोत्तोलन, टेबल टेनिस, वुशू, ताइक्वांडो, बैडमिंटन और स्विमिंग जैसी प्रमुख विधाएं शामिल हैं। इन खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त आठ और खेलों—बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, तीरंदाजी, निशानेबाजी, कबड्डी, घुड़सवारी आदि—के प्रस्ताव को भी मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दे दी है। इन खेलों की सुविधाएं उसी अतिरिक्त 10 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएंगी।
बनेगा हाई परफॉर्मेंस सेंटर
विश्वविद्यालय परिसर में प्रस्तावित हाई परफॉर्मेंस सेंटर इसकी विशेष पहचान बनेगा। इसमें बायोमैकेनिक्स, स्पोर्ट्स फिजियोलॉजी, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग, फिजियोथेरेपी एवं रिहैबिलिटेशन, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन, पैरा एथलीट परफॉर्मेंस सेंटर, एथलीट मैनेजमेंट और डेटा कंपाइलेशन जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। उद्देश्य यह है कि खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के साथ वैज्ञानिक विश्लेषण और प्रदर्शन सुधार की आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।
450 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि विश्वविद्यालय के पहले चरण के लिए 250 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि दूसरे चरण के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान न होकर खेल उत्कृष्टता का केंद्र बने।
अपने परिसर से शुरू होगा दूसरा सत्र
विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत के अनुसार, दूसरा शैक्षणिक सत्र विश्वविद्यालय के अपने परिसर से संचालित करने की तैयारी है। परिसर में चार कॉलेज और 16 विभाग स्थापित किए जाएंगे। ये चार कॉलेज होंगे:
- कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन
- कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स साइंसेज
- कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी
- कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स कोचिंग
योजना के अनुसार दूसरे सत्र की शुरुआत कम से कम 50% क्षमता से की जाएगी। अगले वर्ष इसे 75% और तीन वर्ष में 100% क्षमता तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
हर जिले में स्टेडियम, हर मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम और जिला स्तर पर बड़े स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं। अब खेल विश्वविद्यालय को केंद्र मानकर प्रत्येक कमिश्नरी में एक स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने की पहल भी आगे बढ़ चुकी है।
साथ ही, प्रदेश के सभी खेल शिक्षा संस्थानों की संबद्धता इस खेल विश्वविद्यालय से की जाएगी, जिससे खेल शिक्षा में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
निजी खेल अकादमियों को भी मिलेगा सहयोग
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो निजी खेल अकादमियां खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, उन्हें भी राज्य सरकार सहयोग प्रदान करेगी। मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकले ओलंपियनों—जैसे अन्नू रानी, प्रियंका गोस्वामी, पारुल चौधरी—का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इन खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद निजी प्रशिक्षण केंद्रों से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच बनाई।
सरकार का उद्देश्य है कि ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अब संसाधनों की कमी न झेलनी पड़े और उन्हें राज्य के भीतर ही विश्वस्तरीय प्रशिक्षण मिल सके।









