लखनऊ, 28 जनवरी 2026। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लाखों कर्मियों के लिए 29 जनवरी की कैबिनेट बैठक उम्मीदों का दिन बन सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में होने वाली इस अहम बैठक में शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव पर मुहर लगने की संभावना है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह निर्णय प्रदेश के करीब आठ लाख से अधिक शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
दरअसल, अब तक राज्य कर्मचारियों को मिलने वाली कैशलेस चिकित्सा सुविधा से शिक्षक वर्ग वंचित था। लंबे समय से इसकी मांग उठती रही है। पिछले वर्ष 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को यह सुविधा देने की घोषणा की थी। उसी घोषणा को अब नीतिगत रूप देने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
आयुष्मान योजना की तर्ज पर लागू होगी व्यवस्था
शिक्षा विभाग और संबंधित विभागों ने मिलकर इस योजना का प्रारूप तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार, यह व्यवस्था आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर पूरी तरह कैशलेस होगी, यानी इलाज के दौरान शिक्षकों या उनसे जुड़े लाभार्थियों को अस्पताल में किसी प्रकार का भुगतान नहीं करना होगा। उपचार का खर्च सीधे शासन की ओर से वहन किया जाएगा। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि आपात स्थिति में इलाज में होने वाली देरी भी रोकी जा सकेगी।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि अब तक गंभीर बीमारी की स्थिति में कई शिक्षकों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए कर्ज लेना पड़ता था या बचत तोड़नी पड़ती थी। ऐसे में कैशलेस चिकित्सा सुविधा उनके लिए वास्तविक सामाजिक सुरक्षा का काम करेगी।
सिर्फ शिक्षा नहीं, शहरी विकास भी एजेंडे में
कैबिनेट की इस बैठक का एजेंडा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, लखीमपुर खीरी में हाल ही में नाव पलटने से हुए हादसे में प्रभावित ग्रामीणों को आवास उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। सरकार की मंशा है कि पीड़ित परिवारों को शीघ्र राहत दी जाए।
इसके साथ ही, आवास विभाग की वाह्य विकास शुल्क प्रणाली में सुधार के लिए
‘उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क) उद्ग्रहण, संग्रहण नियमावली, 2026’ को मंजूरी दी जा सकती है। यह नियमावली शहरी क्षेत्रों में विकास शुल्क की वसूली और उपयोग की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाएगी।
शहरी पुनर्विकास नीति 2026 पर भी नजर
बैठक में उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति, 2026 को भी स्वीकृति मिलने की संभावना है। इस नीति का उद्देश्य पुराने शहरी क्षेत्रों के सुनियोजित विकास, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और अव्यवस्थित बसावट को सुधारना है। माना जा रहा है कि इससे शहरों में आवास, सड़क, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं के ढांचे में बड़ा सुधार आएगा।
शिक्षकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
प्रदेश में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालयों से लेकर परिषदीय विद्यालयों तक बड़ी संख्या में शिक्षक कार्यरत हैं। इनके साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक और मध्यान्ह भोजन योजना से जुड़े रसोइए भी शिक्षा तंत्र की अहम कड़ी हैं। लंबे समय से यह वर्ग खुद को स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में उपेक्षित महसूस करता रहा है। ऐसे में कैशलेस चिकित्सा का दायरा बढ़ाकर इन सभी को शामिल करना सरकार के लिए एक बड़ा सामाजिक संदेश भी माना जा रहा है।
यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो यह निर्णय न केवल शिक्षकों की जीवन गुणवत्ता सुधारने वाला होगा, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत कर्मियों के मनोबल को भी बढ़ाएगा।
सबकी नजर 29 जनवरी की बैठक पर
अब सभी की नजर 29 जनवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी है। शिक्षा जगत से जुड़े लाखों लोग इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार किन-किन प्रस्तावों पर मुहर लगाती है और किन फैसलों के साथ प्रदेश के प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे में नया अध्याय जुड़ता है।











