नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026। फरवरी में प्रस्तावित IndiaAI Impact Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र के शीर्ष उद्योगपतियों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) और शिक्षाविदों के साथ एक उच्च-स्तरीय गोलमेज संवाद किया। यह बैठक केवल औपचारिक चर्चा भर नहीं थी, बल्कि भारत के उभरते AI पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) की दिशा और गति तय करने का एक रणनीतिक प्रयास भी थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, यह संवाद भारत के AI मिशन को गति देने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और वैश्विक सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। बैठक का संदर्भ स्पष्ट था— आने वाला IndiaAI Impact Summit भारत के AI विजन को दुनिया के सामने रखने का एक बड़ा मंच बनने जा रहा है।
सरकार के प्रयासों की सराहना
संवाद के दौरान उपस्थित CEOs और विशेषज्ञों ने AI के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर (self-reliant) बनाने की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की खुलकर सराहना की। उन्होंने माना कि नीति-स्तर पर स्पष्टता, डिजिटल अवसंरचना (digital infrastructure) का विस्तार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिल रहा समर्थन, भारत को वैश्विक AI मानचित्र पर तेजी से स्थापित कर रहा है।
कौन-कौन रहा मौजूद?
इस गोलमेज बैठक में देश की अग्रणी तकनीकी कंपनियों और संस्थानों का प्रतिनिधित्व दिखा। इनमें एचसीएल टेक, जोहो कॉर्पोरेशन, एलटीआई माइंडट्री, जिओ प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड, अदाणीकोनेक्स, एनक्स्ट्रा डेटा और नेटवेब टेक्नोलॉजीज के CEO शामिल थे।
शैक्षणिक जगत से आईआईआईटी हैदराबाद, आईआईटी मद्रास और आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञ मौजूद रहे।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी बैठक का हिस्सा बने।
पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश: तकनीक से प्रभाव
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमें अपनी तकनीक से प्रभाव पैदा करना चाहिए और दुनिया को प्रेरित भी करना चाहिए।”
उन्होंने विशेषज्ञों से अपील की कि भारत को वैश्विक AI प्रयासों के लिए एक उत्पादक और विश्वसनीय केंद्र बनाया जाए।
प्रधानमंत्री ने डेटा सुरक्षा (data security), तकनीक के लोकतंत्रीकरण (democratization of technology) और एक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं सुरक्षित AI तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि AI का विकास केवल तेज नहीं, बल्कि नैतिक (ethical) भी होना चाहिए।
नैतिकता, कौशल और भारतीय मूल्य
प्रधानमंत्री ने AI के नैतिक उपयोग में किसी भी प्रकार के समझौते से बचने की बात कही। साथ ही, AI स्किल डेवलपमेंट (skill development) और प्रतिभा निर्माण (talent building) को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत का AI पारिस्थितिकी तंत्र देश के चरित्र, संस्कृति और मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
निष्कर्ष
आने वाले IndiaAI Impact Summit से पहले यह संवाद इस बात का संकेत है कि भारत AI के क्षेत्र में केवल सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की तैयारी में है। सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच यह समन्वय भारत को AI महाशक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।











