लखनऊ, 29 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए सामंजस्यपूर्ण निर्णय लेकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। बैठक में मंजूर हुई “उत्तर प्रदेश ईंट भट्ठा (स्थापना के लिए स्थल मापदंड) (प्रथम संशोधन) नियमावली 2026” के तहत अब उत्तर प्रदेश ईंट भट्ठे वैध किए जाएंगे, जिससे प्रदेश के चार हजार से अधिक ईंट भट्ठों को नियमित रूप से संचालित होने का अधिकार मिलेगा।
भट्ठा उद्योग, जो दशकों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और श्रमिक रोजगार का अहम स्तंभ रहा है, पिछले कई वर्षों से नियमावली के कारण अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था। वर्ष 2012 में लागू पहली नियमावली के बाद लगभग 6,500 ईंट भट्ठों को अवैध घोषित किया गया था — जिसके कारण उद्योग और उससे जुड़ी ग्राम-स्तरीय कार्यबल पर गंभीर प्रभाव पड़ा था। आज के निर्णय से उनमें से करीब चार हजार भट्ठों को राहत मिली है और वे वैध मान्यता के दायरे में आ जाएंगे।
किसे मिली राहत? — नियमों के सख्त वाद और मानवीय विवेक का संतुलन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल उन्हीं भट्ठों को प्रदान की जाएगी जिनके पास 2012 से पहले जिला पंचायत या किसी सरकारी विभाग में पंजीकरण या मान्यता (NOC) थी। यह कदम सिर्फ तकनीकी रियायत नहीं, बल्कि उन कुटीर-उद्योगों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास भी है जो दशकों से स्थानीय निर्माण और रोजगार के अभिन्न हिस्से रहे हैं।
नए संशोधन के बाद भट्ठा संचालकों को यह साबित करना होगा कि उनकी स्थापना नीतियों के पहले हुई थी — इसके लिए उन्हें वैट पंजीकरण, जिला पंचायत/नगर निकाय अनुमति, भूमि रिकॉर्ड आदि प्रस्तुत करने होंगे। इसके पश्चात् उन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन तथा अन्य आवश्यक अनुमतियों के साथ संचालन की अनुमति दी जाएगी।
नई तकनीक और पर्यावरण-अनुकूल प्रोत्साहन भी मिलेगा
सरकार ने सिर्फ पुराने भट्ठों को राहत नहीं दी, बल्कि भविष्य उन्मुख दृष्टिकोण को भी अपनाया है। अब नियमावलियों में यह प्रावधान है कि पर्यावरण-अनुकूल तकनीक अपनाने वाले भट्ठों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे प्रदूषण को नियंत्रित करते हुए उत्पादन क्षमता में वृद्धि संभव हो सके।
नए भट्ठों के लिए नियम भी बदले
2012 की नियमावली के तहत ईंट भट्ठों को आबादी से कम से कम 1 किलोमीटर दूर स्थापित किया जाना अनिवार्य था। लेकिन आज कैबिनेट ने इसे घटाकर 800 मीटर किया है, ताकि छोटे और मध्यम-श्रेणी के निवेशकों को भी भूमि नियोजन में कठिनाई न हो।
इसके अलावा नियमावली में पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए:
- भट्ठों के चारों ओर 10 मीटर चौड़ी हरित पट्टी या
- जहां जगह न हो वहाँ 3 मीटर ऊँची दीवार
बनाने का प्रावधान है।
साथ ही चिमनी की ऊँचाई, उत्सर्जन मानक, और न्यूनतम दो एकड़ भूमि की आवश्यकता की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है।
विश्लेषण: राहत, रोजगार और संतुलन
यह कदम न सिर्फ करीब 30–40 हजार स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार के द्वार खोलेगा, बल्कि प्रदेश सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होने की संभावनाएं मजबूत करेगा।
जहाँ एक ओर यह सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से स्वागत योग्य है, वहीं दूसरी ओरस्तर यह स्पष्ट संदेश देता है कि नियम और पर्यावरण सुरक्षा दोनों को पूरक रूप से लागू किया जा सकता है।











