लखनऊ, 31 जनवरी 2026। केंद्रीय बजट की आहट के साथ उत्तर प्रदेश ने अपनी प्राथमिकताएँ साफ कर दी हैं। Budget 2026 यूपी के संदर्भ में अनुमान है कि इस बार केंद्र से राज्य को 4.10–4.25 लाख करोड़ रुपये तक की कुल सहायता/आवंटन मिल सकता है। पिछले वित्त वर्ष में यह राशि लगभग 3.92 लाख करोड़ रुपये रही थी। यदि औसतन 8% वृद्धि होती है, तो यह छलांग स्वाभाविक मानी जा रही है।
बजट-पूर्व बैठक में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष 75,000 करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा है—फोकस साफ है: शहरी परिवहन, पेयजल, हरित ऊर्जा, शिक्षा-स्वास्थ्य और पूंजीगत ढांचा।
शहरी परिवहन: मेट्रो विस्तार और कनेक्टिविटी
लखनऊ, कानपुर, आगरा और उभरते शहरों में मेट्रो नेटवर्क बढ़ाने के लिए 32,075 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता माँगी गई है। साथ ही, उत्तर–दक्षिण एक्सप्रेस मार्ग को राष्ट्रीय मार्ग नेटवर्क से जोड़ने और लखनऊ उच्च न्यायालय की खंडपीठ से पश्चिमी यूपी की बेहतर प्रशासनिक कनेक्टिविटी जैसे प्रस्ताव भी रखे गए हैं। मकसद—तेज आवागमन, कम प्रदूषण, और आर्थिक गतिविधियों को गति।
जल जीवन मिशन: गाँवों में नल से जल
ग्रामीण पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए जल जीवन मिशन के तहत 33,750 करोड़ रुपये के अतिरिक्त अनुदान की मांग है। इसके अलावा 60,000 तालाबों के पुनरुद्धार और भूजल रिचार्ज के लिए 6,000 करोड़ रुपये का अलग प्रस्ताव दिया गया है। यह पैकेज पानी, पर्यावरण और कृषि—तीनों पर एक साथ असर डालने की सोच के साथ तैयार किया गया है।
ऊर्जा: नगर निकायों में सौर कदम
ऊर्जा लागत घटाने और हरित संक्रमण तेज करने के लिए 17 नगर निगमों में सौर संयंत्र तथा एक सौर अनुसंधान केंद्र की स्थापना हेतु 1,005 करोड़ रुपये की मांग रखी गई है। लक्ष्य—नगर निकायों के बिजली बिल में कटौती और स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार।
शिक्षा और स्वास्थ्य: संस्थान + स्कूल नेटवर्क
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और बुंदेलखंड में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की स्थापना का प्रस्ताव है। साथ ही, प्रत्येक तहसील में नवोदय विद्यालय और पीएम श्री विद्यालय योजना के तहत 797 नए विद्यालयों के लिए 655 करोड़ रुपये की मांग की गई है। महिला सशक्तिकरण हेतु एआई-आधारित कौशल प्रशिक्षण योजना भी एजेंडे में है।
बड़े आर्थिक प्रस्ताव: हिस्सेदारी और पूंजीगत सहायता
राज्य ने दो प्रमुख वित्तीय माँगें भी उठाई हैं:
- केंद्रीय करों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़े।
- राज्यों के लिए पूंजीगत परियोजनाओं की विशेष सहायता योजना का आकार 1.5 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया जाए, ताकि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को गति मिल सके।
निष्कर्ष
Budget 2026 यूपी की तस्वीर बताती है कि राज्य ने मांगों को बिखरा नहीं रखा, बल्कि परिवहन, पानी, ऊर्जा, शिक्षा-स्वास्थ्य और पूंजीगत ढांचे के इर्द-गिर्द एक समेकित खाका पेश किया है। अब निगाहें बजट घोषणाओं पर हैं—कितना मिलता है, और कितनी तेजी से जमीन पर उतरता है।










