नई दिल्ली। निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश बजट भाषण में जिन घोषणाओं का जिक्र किया, उनका असर सीधे बाजार की कीमतों और आम लोगों के खर्च पर दिखेगा। इस बार फोकस दो दिशाओं में साफ दिखा—एक तरफ स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और घरेलू विनिर्माण (मेक-इन-इंडिया) को राहत; दूसरी तरफ कुछ वस्तुओं पर लागत बढ़ाकर राजस्व संतुलन की कोशिश।
सरकार ने कस्टम ड्यूटी में चुनिंदा कटौती कर सोलर उपकरण, जूते, मोबाइल बैटरी, ओवन, सीएनजी/बायोगैस, और कई गंभीर बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने का रास्ता बनाया है। वहीं शराब, स्क्रैप और खनिज पर बढ़ोतरी से ये सामान महंगे पड़ेंगे। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3% रहने का अनुमान भी बताया गया—यानी राहत और अनुशासन, दोनों साथ।
क्या-क्या सस्ता हुआ?
1) सोलर उपकरण
सोलर पैनल, मॉड्यूल और संबंधित उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी में राहत से रूफटॉप सोलर लगाने की लागत घटेगी। इससे घरों और छोटे कारोबारों के लिए स्वच्छ ऊर्जा अपनाना सुलभ होगा।
2) मोबाइल बैटरी, स्मार्टफोन और टैबलेट
इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के कदमों से भारत में बने डिवाइस सस्ते पड़ेंगे। मोबाइल बैटरी पर राहत का असर सीधे रिप्लेसमेंट कॉस्ट पर दिखेगा, जबकि घरेलू उत्पादन बढ़ने से स्मार्टफोन/टैबलेट की कीमतों में नरमी आ सकती है।
3) ओवन और कुछ घरेलू उपकरण
किचन अप्लायंसेज़ की चुनिंदा श्रेणियों पर ड्यूटी में कमी से ओवन जैसे उत्पाद किफायती होंगे—मध्यमवर्गीय रसोई के बजट को राहत।
4) स्वास्थ्य क्षेत्र: बड़ी राहत
- कैंसर से जुड़ी 17 दवाएं सस्ती
- 7 दुर्लभ (rare) बीमारियों की दवाएं सस्ती
- शुगर (डायबिटीज) की दवाओं पर राहत
- कुछ मेडिकल डिवाइस पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई
यह कदम गंभीर रोगियों के इलाज की लागत कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
5) सीएनजी और बायोगैस
स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए कीमतों में राहत—परिवहन और छोटे व्यवसायों के परिचालन खर्च पर सकारात्मक असर।
6) विदेश यात्रा
ड्यूटी/लेवी में समायोजन से अंतरराष्ट्रीय यात्रा की लागत में कमी की संभावना बताई गई है, जिससे यात्रियों को राहत मिल सकती है।
क्या-क्या महंगा हुआ?
1) शराब (Liquor)
ड्यूटी बढ़ने से रिटेल कीमतें ऊपर जाएंगी।
2) स्क्रैप (Scrap)
धातु स्क्रैप महंगा होने से रीसाइक्लिंग और कुछ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ सकती है।
3) खनिज (Minerals)
खनिजों पर बढ़ोतरी का असर संबंधित उद्योगों की इनपुट कॉस्ट पर पड़ेगा, जो आगे कीमतों में झलक सकता है।
मेक-इन-इंडिया को बढ़त, उपभोक्ता को राहत
इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पर जोर का अर्थ है—घरेलू फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा, सप्लाई-चेन स्थानीय होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी। इसका सीधा लाभ कीमतों में प्रतिस्पर्धा के रूप में दिख सकता है। लंबे समय में यह कदम टेक्नोलॉजी उत्पादों को अधिक किफायती बना सकता है।
राजकोषीय तस्वीर
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 4.3% (GDP) रहने का अनुमान रखा गया है। संकेत साफ है—सरकार राहत भी दे रही है और वित्तीय अनुशासन भी साध रही है।
आम आदमी के लिए इसका मतलब
- घर की छत पर सोलर लगाने का सपना थोड़ा सस्ता
- मोबाइल/टैबलेट खरीदना और बैटरी बदलना किफायती
- गंभीर बीमारियों के इलाज में खर्च का दबाव कुछ कम
- स्वच्छ ईंधन से चलने वाले वाहन/व्यवसाय को राहत
- लेकिन शराब, स्क्रैप और खनिज आधारित उत्पाद महंगे पड़ सकते हैं
नीतिगत संतुलन का यह बजट रोजमर्रा के खर्च और दीर्घकालिक लक्ष्यों—स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा, और विनिर्माण—तीनों को साथ लेकर चलता दिखता है।











