नई दिल्ली, Tue 03 Feb 2026 — लंबे राजनीतिक ठहराव के बाद आखिरकार युमनाम खेमचंद सिंह के नाम पर सहमति बन गई है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक में उन्हें नेता चुना गया, जिससे मणिपुर के नए मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने वाली है और केंद्र को इसे आगे बढ़ाने के लिए संसदीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता था।
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद से राज्य में नेतृत्व का रिक्त स्थान बना हुआ था। हिंसा और अस्थिरता के दौर के बीच करीब एक वर्ष तक मुख्यमंत्री पद खाली रहा। इस पृष्ठभूमि में दिल्ली में भाजपा विधायकों की सक्रियता बढ़ी और केंद्रीय नेतृत्व ने पर्यवेक्षण की भूमिका भी तय की। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ को राज्य का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था, जिसने विधायक दल की सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
कौन हैं युमनाम खेमचंद?
युमनाम खेमचंद दो बार सिंगजामेई सीट से विधायक चुने जा चुके हैं। वे मणिपुर विधान सभा के स्पीकर भी रह चुके हैं और 2022 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। मैतेई समुदाय से आने वाले खेमचंद का प्रशासनिक अनुभव, विधानसभा संचालन की समझ और दल के भीतर स्वीकार्यता—तीनों कारक उनके पक्ष में जाते दिखे। पार्टी के अंदर उन्हें एक संतुलित, संवादशील और प्रक्रियात्मक नेता के रूप में देखा जाता है।
राष्ट्रपति शासन की समय-सीमा और राजनीतिक गणित
राज्य में 13 फरवरी 2025 को छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिसे अगस्त 2025 में बढ़ाया गया। यदि अब भी सरकार गठन में देरी होती, तो केंद्र सरकार को बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में वैधानिक प्रस्ताव लाना पड़ता। ऐसे में विधायक दल की त्वरित बैठक और नेतृत्व चयन ने संवैधानिक जटिलता को टाल दिया।
वर्तमान सियासी गणित भी सरकार गठन के अनुकूल दिखता है:
- भाजपा – 37
- नेशनल पीपुल्स पार्टी – 6
- नागा पीपुल्स फ्रंट – 5
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – 5
- कुकी पीपुल्स अलायंस – 2
- जनता दल (यूनाइटेड) – 1
- निर्दलीय – 3
- एक सीट रिक्त
यह समीकरण बताता है कि यदि सहयोगी दल साथ आते हैं तो स्थिर सरकार का अंकगणित मौजूद है।
विधायकों की प्रतिक्रिया
भाजपा विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “निर्वाचित और लोकप्रिय सरकार” की वापसी से समाधान की राह खुलेगी। उनके अनुसार, देरी लंबी रही, लेकिन अब केंद्र के मार्गदर्शन और युमनाम खेमचंद के नेतृत्व में स्थिरता की उम्मीद है।
आगे क्या?
अब औपचारिक दावा पेश करने, राज्यपाल से मिलकर सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू करने और शपथ ग्रहण की तारीख तय करने जैसे कदम शेष हैं। राजनीतिक संकेत साफ हैं—मणिपुर प्रशासनिक रिक्तता से निकलकर निर्वाचित शासन की ओर बढ़ रहा है, और इस संक्रमण के केंद्र में युमनाम खेमचंद हैं।











