लखनऊ (Tue, 03 Feb 2026) —योगी आदित्यनाथ ने आगामी बरसात और संभावित अतिवृष्टि के मद्देनज़र बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की बारीकी से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को साफ शब्दों में चेताया है कि किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंगलवार को लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर हुई बैठक में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जहाँ तटबंधों की स्थिति, ड्रेनों की मरम्मत, और नदी तंत्र की निगरानी पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक का फोकस साफ था: बरसात शुरू होने से पहले सभी संवेदनशील बिंदुओं पर काम समयसीमा में पूरा हो और मैदानी स्तर पर निगरानी तंत्र सक्रिय रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन के साथ मजबूत समन्वय का भी विषय है
23 जिलों में 37 तटबंध चिन्हित, 706.5 किमी लंबाई पर विशेष नजर
प्रमुख सचिव, सिंचाई द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश के गंगा, सरयू (घाघरा), राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन के आसपास स्थित 23 जिले बाढ़ की दृष्टि से प्रभावित श्रेणी में आते हैं। इनमें:
- 11 जिलों के 19 तटबंध – अति संवेदनशील
- 12 जिलों के 18 तटबंध – संवेदनशील
- सभी तटबंधों की कुल लंबाई – 706.5 किमी
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन तटबंधों पर भौतिक निरीक्षण, मरम्मत और मजबूती का कार्य प्राथमिकता पर पूरा किया जाए। जहां भी रिसाव, कटाव या संरचनात्मक कमजोरी के संकेत हों, वहाँ तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई हो।
ड्रोन-मैपिंग, सेंसर और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग
बाढ़ प्रबंधन को तकनीक से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए:
- ड्रोन-मैपिंग से संवेदनशील हिस्सों का सर्वे
- वाटर लेवल सेंसर की सक्रिय निगरानी
- स्थानीय प्रशासन और विभाग के बीच त्वरित सूचना साझाकरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी इनपुट के आधार पर निर्णय लेने से प्रतिक्रिया समय घटेगा और संभावित जोखिम पहले ही चिन्हित हो सकेंगे।
मेन स्ट्रीम में ड्रेजिंग, ड्रेनों की मरम्मत समय पर
नदियों की मुख्य धारा (Main Stream) में जरूरत के अनुसार ड्रेजिंग कर सिल्ट निकालने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि जल प्रवाह बाधित न हो। साथ ही, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के ड्रेनों की मरम्मत व सफाई समय पर पूरी करने को कहा गया है, जिससे अतिवृष्टि की स्थिति में जल निकासी सुचारु रहे।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश रहा—“कागज़ी तैयारी नहीं, ज़मीनी काम दिखना चाहिए।” उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आगाह किया कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
क्यों अहम है यह तैयारी?
बरसात के दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने, सिल्ट जमाव और तटबंधों पर दबाव बढ़ने से कई बार हालात नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं। ऐसे में समय रहते बाढ़ प्रबंधन की ठोस तैयारी न केवल जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि राहत-बचाव की जरूरत भी कम करती है।











