नई दिल्ली, 6 फरवरी 2026। बोर्ड परीक्षाओं की आहट के बीच परीक्षा पे चर्चा के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को एक सधा हुआ, जीवनमूल्य से जुड़ा संदेश दिया—अंकों की दौड़ में उलझने के बजाय सीखने की यात्रा पर भरोसा रखिए, तनाव को साथी नहीं, दूरी पर रखिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा केवल उत्तर-पुस्तिका नहीं, आत्म-मूल्यांकन का अवसर है।
पीएम ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने पढ़ाई के पैटर्न पर विश्वास रखें। “सलाह सुनो, समझो, ठीक लगे तो अपनाओ—पर किसी के कहने भर से खुद को मत बदलो,” उन्होंने सहज अंदाज़ में कहा। अपने अनुभव का उदाहरण देते हुए जोड़ा कि जिम्मेदारियों के शिखर पर पहुंचने के बाद भी लोग तरह-तरह की राय देते हैं, पर अंतिम निर्णय विवेक से ही लेना चाहिए।
‘परीक्षा पे चर्चा’ में शिक्षा और स्किल का संतुलन
तेलंगाना के छात्र वेंकटेश के सवाल—“स्किल जरूरी या मार्क्स?”—पर पीएम ने संतुलन का सूत्र रखा। उनके शब्दों में, शिक्षा और कौशल जुड़वा हैं। स्किल भी दो तरह की—लाइफ स्किल और प्रोफेशनल स्किल—और दोनों ही जीवन के लिए आवश्यक। उन्होंने कहा, एक तरफ ज्यादा झुकाव असंतुलन पैदा करता है।
‘अंकों की बीमारी’ से दूरी, सपनों से नजदीकी
पीएम ने स्पष्ट किया कि अंक सीमित समय तक महत्व रखते हैं, पर जीवन की दिशा दीर्घकाल में तय होती है। इसलिए फोकस इस पर हो कि “मेरा जीवन कहां पहुंचा?” उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी—“सपने न देखना भी अपराध है।” साथ ही सफल लोगों की जीवनी पढ़ने की सलाह दी, ताकि सपनों को कर्म का आधार मिले।
गेमिंग, एआई और तकनीक के सुरक्षित उपयोग पर सीख
डिजिटल आकर्षण पर बात करते हुए पीएम ने कहा कि सस्ता डेटा समय की बर्बादी का कारण न बने। केवल मनोरंजन के लिए घंटों गेमिंग से बचें। उन्होंने ऑनलाइन जुए के खतरे का उल्लेख करते हुए छात्रों को सजग रहने को कहा और एआई के सुरक्षित, उपयोगी इस्तेमाल की दिशा भी बताई।
हल्के पल: ‘चाय वाले को चाय’
चर्चा के बाद छात्रों ने अपने-अपने राज्यों के प्रतीक उपहार भेंट किए। त्रिपुरा की एक छात्रा ने ऑर्गेनिक चाय दी तो पीएम मुस्कराए—“चाय वाले को चाय।” सभागार ठहाकों से गूंज उठा, और माहौल में सहजता घुल गई।
पीएम के प्रमुख सूत्र (Key Takeaways)
- लक्ष्य पहुंच के भीतर हों, पर बहुत आसान नहीं
- पढ़ाई, स्किल, आराम और हॉबी—संतुलन ही कुंजी
- बनने की नहीं, करने की इच्छा रखें
- मिलकर सीखना सभी को बेहतर बनाता है
- स्कूली पढ़ाई पर ध्यान; प्रतियोगी परीक्षाएं साथ/बाद में
- परीक्षाएं त्योहार की तरह मनाएं
- कंफर्ट ज़ोन नहीं, आपका जीने का तरीका भविष्य गढ़ता है
शिक्षकों और अभिभावकों के लिए संदेश
शिक्षकों से उन्होंने जिज्ञासा जगाने और समझ गहरी करने पर जोर दिया। अभिभावकों से कहा कि बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार खिलने दें, तुलना की छाया से दूर रखें।













