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उत्तर प्रदेश में फिल्म गोदान टैक्स फ्री: गो संरक्षण विषय पर बनी फिल्म को योगी सरकार का बड़ा फैसला

On: February 6, 2026
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उत्तर प्रदेश में फिल्म गोदान टैक्स फ्री
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खनऊ, 6 फरवरी 2026। गो संरक्षण के विषय पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और उसी दिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की घोषणा कर दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस निर्णय को सरकार ने सामाजिक जागरूकता से जोड़ा है, जबकि फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर विरोध की आवाज़ें भी सामने आई हैं।

सरकार का तर्क है कि यह फिल्म भारतीय संस्कृति में गौवंश, पंचगव्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय की भूमिका को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी फिल्में समाज में संवेदनशील विषयों पर संवाद को बढ़ाती हैं और गोवंश संरक्षण के प्रति जनचेतना विकसित करती हैं।

कानून, नीति और सिनेमा का संगम

योगी सरकार पहले ही गोवध निवारण कानून को सख्त बना चुकी है। गोहत्या जैसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून National Security Act (NSA) लगाए जाने का प्रावधान भी राज्य में चर्चा का विषय रहा है। इसी पृष्ठभूमि में ‘गोदान’ का टैक्स फ्री होना केवल फिल्मी निर्णय नहीं, बल्कि नीति-संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, टैक्स फ्री होने से फिल्म अधिक दर्शकों तक पहुंचेगी, जिससे गो संरक्षण को लेकर सकारात्मक सोच का विस्तार होगा—खासकर युवाओं में।

निर्माता की मुलाकात और ट्रेलर लॉन्च

फिल्म के निर्माता विनोद चौधरी ने 31 जनवरी को मुख्यमंत्री से भेंट कर फिल्म की विषयवस्तु और उद्देश्य की जानकारी दी थी। उसी अवसर पर ट्रेलर लॉन्च भी किया गया और फिल्म को टैक्स फ्री करने का अनुरोध रखा गया। रिलीज के दिन यह अनुरोध सरकारी निर्णय में बदल गया।

विरोध के स्वर भी तेज

फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर विरोध सामने आया है। मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन और मौलाना इशाक साहब ने आरोप लगाया कि कुछ दृश्य एक खास समुदाय को निशाना बनाते प्रतीत होते हैं। उन्होंने सेंसर बोर्ड से फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है। हालांकि, फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड Central Board of Film Certification (CBFC) से प्रमाणन प्राप्त है और रिलीज तय कार्यक्रम के अनुसार हुई।

फिल्म का कथ्य: आस्था के साथ वैज्ञानिक दृष्टि

‘गोदान’ में गौशाला, पशु-चिकित्सा, जैविक खेती, पंचगव्य और ग्रामीण जीवन के कई आयामों को कथानक में पिरोया गया है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि किस प्रकार वैज्ञानिक पद्धतियों से गौवंश मानव जीवन और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी हो सकता है। कहानी में कुछ वास्तविक घटनाओं से प्रेरित प्रसंग भी जोड़े गए हैं, जो इसे भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर प्रभावी बनाते हैं।

संदेश, सिनेमा और समाज

सरकार का मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, सामाजिक संवाद का माध्यम भी है। ‘गोदान’ के बहाने गो सेवा, गोरक्षा और ग्रामीण संरचना पर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। वहीं, विरोध के स्वर इस बात का संकेत देते हैं कि विषय संवेदनशील है और प्रस्तुति पर समाज की नजर भी उतनी ही सजग।

फिलहाल, ‘गोदान’ उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री होकर सिनेमाघरों में चल रही है—एक ओर सरकारी समर्थन, दूसरी ओर सामाजिक बहस के बीच यह फिल्म दर्शकों की कसौटी पर है।

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