प्रयागराज, 7 फरवरी 2026। परीक्षा का मौसम आते ही सबसे बड़ा सवाल यही उठता है—नकल पर कैसे लगे लगाम और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा कैसे हो। इसी चिंता को केंद्र में रखकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा के लिए सुरक्षा का ऐसा खाका तैयार किया है, जिसमें अति संवेदनशील केंद्र फोकस में हैं। प्रदेश के 222 अति संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की तैनाती होगी। जिलों में बने कंट्रोल रूम पर प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी करेंगे, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था का केंद्रबिंदु: अति संवेदनशील केंद्र
बोर्ड की रणनीति साफ है—जहां जोखिम ज्यादा, वहां निगरानी और सख्त। सभी परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूम की अनिवार्य जांच होगी। अति संवेदनशील केंद्रों का प्रतिदिन दो बार अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। स्टैटिक मजिस्ट्रेट (Static Magistrate) को सामान्यतः नहीं बदला जाएगा, ताकि जवाबदेही स्पष्ट रहे। वहीं क्षेत्राधिकारी (CO) और थाना प्रभारी (SO) नियमित पेट्रोलिंग करेंगे। परीक्षा केंद्रों के आसपास फोटो कॉपी की दुकानों पर रोक और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा।
परिषद के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया कि नियमित निरीक्षण, मानवीय सतर्कता और तकनीकी नियंत्रण—इन तीन स्तंभों पर परीक्षा की निगरानी टिकी होगी। उद्देश्य एक ही है: नकल विहीन और शांतिपूर्ण परीक्षा।
53.37 लाख परीक्षार्थी, 8033 केंद्र
इस वर्ष कुल 53,37,778 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। इनमें हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 विद्यार्थी हैं। परीक्षा संचालन के लिए पूरे प्रदेश में 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। हाल ही में मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में परिषद की कार्ययोजना को शासन स्तर पर मंजूरी दी गई।
परीक्षार्थियों का विवरण
- हाईस्कूल: संस्थागत 27,50,862 | व्यक्तिगत 10,834 | योग 27,61,696
- इंटरमीडिएट: संस्थागत 24,91,373 | व्यक्तिगत 84,709 | योग 25,76,082
परीक्षा तिथियां और समय
- अवधि: 18 फरवरी से 12 मार्च 2026
- पहली पाली: सुबह 8:30 से 11:45 बजे
- दूसरी पाली: दोपहर 2:00 से 5:15 बजे
इन समय-सारिणियों के बीच सुरक्षा और अनुशासन की निरंतरता बनाए रखने के लिए जिलों के कंट्रोल रूम सक्रिय रहेंगे। हर संवेदनशील बिंदु पर त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था की गई है।
क्यों जरूरी है यह सख्ती?
पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि परीक्षा केंद्रों के आसपास की छोटी ढिलाई भी बड़े दुरुपयोग का कारण बन सकती है। इसलिए इस बार रणनीति केवल “निगरानी” नहीं, बल्कि “निवारण” पर आधारित है। फोटो कॉपी दुकानों पर रोक, लाउडस्पीकर प्रतिबंध, स्ट्रांग रूम की सील जांच, और अति संवेदनशील केंद्रों पर STF-LIU की मौजूदगी—ये कदम उसी सोच का हिस्सा हैं।
निष्कर्षतः, इस बार की व्यवस्था संदेश देती है कि परीक्षा केवल प्रश्न-उत्तर की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विश्वास की परीक्षा भी है। और उस विश्वास की रक्षा के लिए प्रशासन ने अति संवेदनशील केंद्रों पर सुरक्षा की सबसे मजबूत परत बिछा दी है।








