राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

बदरीनाथ प्राधिकरण: मास्टर प्लान के बाद रखरखाव की नई व्यवस्था, केदारनाथ मॉडल पर होगा संचालन

On: February 8, 2026
Follow Us:
बदरीनाथ प्राधिकरण- मास्टर प्लान के बाद रखरखाव की नई व्यवस्था
---Advertisement---

चमोली | Sun, 08 Feb 2026 — हिमालय की गोद में बसे पवित्र धाम बदरीनाथ धाम में चल रहे व्यापक मास्टर प्लान के कार्य अब एक नए प्रशासनिक अध्याय की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। शासन ने संकेत दिया है कि काम पूरे होते ही यहां के रखरखाव और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों की जिम्मेदारी एक अलग निकाय—बदरीनाथ प्राधिकरण—को सौंपी जाएगी। यह व्यवस्था केदारनाथ धाम में लागू मॉडल की तर्ज पर तैयार की जा रही है, जिसने आपदा के बाद पुनर्निर्माण और प्रबंधन में स्पष्ट परिणाम दिए हैं।

बदरीनाथ प्राधिकरण क्यों ज़रूरी माना गया?

पिछले चार वर्षों से मास्टर प्लान के अंतर्गत यहां झीलों, सड़कों, प्लाज़ा, रिवर फ्रंट और सार्वजनिक सुविधाओं का कायाकल्प हो रहा है। बदरीश झील और शेषनेत्र झील के सौंदर्यीकरण के बाद लोक निर्माण विभाग (पीआईयू) ने इनके रखरखाव का दायित्व नगर पंचायत को देने की सिफारिश की, लेकिन कार्यभार अधिक होने का हवाला देकर नगर पंचायत ने इसे लेने से इंकार कर दिया। यहीं से यह व्यावहारिक सवाल उभरा—इतने बड़े और संवेदनशील कामों का दीर्घकालीन रखरखाव कौन करेगा?

शासन स्तर पर मंथन के बाद यह सहमति बनी कि एक समर्पित, पेशेवर और जवाबदेह निकाय की आवश्यकता है, जो केवल बदरीनाथ क्षेत्र के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और आवश्यकता-आधारित निर्माण पर केंद्रित रहे। इसी सोच से बदरीनाथ प्राधिकरण की रूपरेखा सामने आई।

केदारनाथ मॉडल से सीख

केदारनाथ में आपदा के बाद बने प्राधिकरण ने न केवल निर्माण कार्यों को गति दी, बल्कि रखरखाव, यात्री प्रबंधन, संकेतक प्रणाली, और नियंत्रित निर्माण जैसे पहलुओं में एक मानक स्थापित किया। उसी अनुभव को बदरीनाथ में संस्थागत रूप देने की तैयारी है, ताकि मौसमी तीर्थयात्रा, नाजुक पारिस्थितिकी और विरासत-परिसर—तीनों के बीच संतुलन बना रहे।

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि मास्टर प्लान के पूर्ण होते ही बदरीनाथ के संरक्षण की जिम्मेदारी प्राधिकरण संभालेगा। शासन स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

350 करोड़ की योजना, 150 करोड़ खर्च

वित्तीय दृष्टि से यह परियोजना भी महत्वपूर्ण है। मास्टर प्लान के लिए 350 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं, जिनमें से अब तक लगभग 150 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:

  • बदरीश झील व शेषनेत्र झील का सौंदर्यीकरण
  • लूप रोड और अराइवल प्लाज़ा का निर्माण
  • अस्पताल भवन और रिवर फ्रंट का विकास
  • दो पुलों का निर्माण
  • तीर्थ पुरोहित आवास
  • मंदिर के 75 मीटर दायरे में सौंदर्यीकरण कार्य

इन परिसंपत्तियों की उपयोगिता तभी टिकाऊ होगी, जब उनका नियमित रखरखाव, मरम्मत, और मानकीकृत संचालन सुनिश्चित हो—यही भूमिका बदरीनाथ प्राधिकरण निभाएगा।

संरक्षण, सौंदर्य और नियोजित विकास—एक साथ

बदरीनाथ प्राधिकरण केवल रखरखाव तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत के अनुसार छोटे-बड़े निर्माण, संकेतक प्रणाली, भीड़ प्रबंधन, और पर्यावरण-संवेदनशील उपाय भी इसके दायरे में होंगे। हिमालयी भूगोल में हर निर्माण एक जिम्मेदारी है; ऐसे में एक विशेषज्ञ निकाय का होना भविष्य के जोखिमों को कम कर सकता है।

स्थानीय प्रशासन मानता है कि यह कदम तीर्थनगरी को दीर्घकाल में व्यवस्थित, स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में निर्णायक साबित होगा। तीर्थयात्रियों के अनुभव में सुधार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now