वाराणसी, 8 फरवरी 2026। जमीन-जायदाद के सौदों में लंबे समय से चल रहे फर्जीवाड़े, बेनामी खरीद-फरोख्त और काले धन के इस्तेमाल पर अब सख्त रोक की तैयारी दिख रही है। जिले में संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए रजिस्ट्री में आधार-पैन अनिवार्य कर दिया गया है। क्रेता-विक्रेता के साथ-साथ गवाहों का मोबाइल नंबर भी आधार से लिंक होना जरूरी होगा। दस्तावेज पूरे न होने पर रजिस्ट्री नहीं होगी।
निबंधन विभाग ने यह व्यवस्था लागू करते हुए उप निबंधक कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पहचान सत्यापन में किसी तरह की ढिलाई न बरती जाए। आधार और पैन की अनिवार्यता से रजिस्ट्री दस्तावेज के साथ वास्तविक व्यक्ति की पहचान स्थायी रूप से जुड़ जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे संपत्ति धोखाधड़ी के मामलों में आरोपियों तक पहुंचना आसान होगा और मुकदमों में कमी आएगी।
सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में अचल संपत्ति के पंजीकरण के जरिए वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर पैन लिंकिंग को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में महानिरीक्षक निबंधन ने सभी उप निबंधक कार्यालयों को आदेश जारी किए हैं कि रजिस्ट्री में आधार-पैन की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए।
अधिकारियों का मानना है कि बेनामी संपत्ति बनाने का ‘पुराना खेल’ अक्सर स्थानीय पहचान का दुरुपयोग कर खेला जाता था—जहां असली मालिक कोई और, दस्तावेजों में नाम किसी और का। कागजों में मामूली छेड़छाड़ कर जमीन का क्रय-विक्रय दिखा दिया जाता था। अब, पहचान दस्तावेजों की कड़ी जांच से ऐसी गुंजाइश काफी घटेगी।
काले धन के इस्तेमाल पर भी इस कदम का असर पड़ेगा। अब किसी और के नाम पर जमीन खरीदना और नकद लेन-देन के जरिए निवेश छिपाना आसान नहीं रहेगा। विक्रेता को अपनी पहचान उजागर करनी होगी और पैन विवरण देना अनिवार्य होगा, जिससे लेन-देन की ट्रैकिंग संभव होगी।
जमीन से जुड़े विवाद अदालतों में सबसे अधिक देखे जाते हैं। संपूर्ण समाधान दिवस जैसे मंचों पर अक्सर शिकायतें आती रही हैं कि किसी ने फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन की रजिस्ट्री करा ली। कई खरीदार भी ऐसे मामलों में फंस जाते हैं, जहां असली काश्तकार का नाम हटाकर किसी और को मालिक दिखा दिया जाता है। नई व्यवस्था से ऐसी शिकायतों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
निबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रजिस्ट्री में आधार-पैन अनिवार्य होने से न केवल क्रेता-विक्रेता की पहचान स्पष्ट होगी, बल्कि गवाहों की भूमिका भी पारदर्शी होगी। मोबाइल नंबर का आधार से लिंक होना जांच की कड़ी को और मजबूत करेगा। नियमों का उल्लंघन कर फर्जीवाड़ा करने पर दंडात्मक कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि यह कदम आम नागरिकों की संपत्ति सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अब रजिस्ट्री प्रक्रिया केवल कागजी औपचारिकता नहीं रहेगी, बल्कि पहचान-आधारित सत्यापन की ठोस प्रणाली के साथ आगे बढ़ेगी।








