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शराब पर सवाल: ‘मार्का’ का ज्ञान नहीं तो असली-नकली की पहचान कैसे? डीआईजी की सख्त फटकार

On: February 8, 2026
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शराब पर सवाल: ‘मार्का’ का ज्ञान नहीं तो असली-नकली की पहचान कैसे? डीआईजी की सख्त फटकार
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मेरठ, 08 फरवरी 2026 (रविवार)। सर्किल निरीक्षण के दौरान कलानिधि नैथानी ने एक सीधा सवाल दागा—“जब शराब के ‘मार्का’ का ही ज्ञान नहीं, तो असली-नकली की पहचान कैसे होगी?” यह टिप्पणी महज नाराजगी नहीं, बल्कि कार्यप्रणाली पर कड़ा संदेश थी। निरीक्षण में महिला सशक्तीकरण से जुड़े रिकॉर्ड, अपराध रजिस्टर और शिकायत निस्तारण में गंभीर कमियां सामने आईं, जिस पर डीआईजी ने मौके पर ही जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

‘मार्का’ पर अटके जवाब, मिली फटकार

देसी शराब से जुड़े मामलों की समीक्षा में थाना स्तर पर ब्रांड/मार्का की बुनियादी जानकारी न होने पर डीआईजी ने मवाना थाना की प्रभारी पूनम जादौन और फलावदा थाना के प्रभारी ब्रह्म कुमार त्रिपाठी को कड़ी फटकार लगाई। उनका तर्क साफ था—मैदान में काम करने वाली टीम यदि लेबल, पैकेजिंग और ब्रांड संकेतों से अनभिज्ञ है, तो नकली शराब की पहचान और रोकथाम कमजोर पड़ जाएगी।

रजिस्टर नंबर-4 और मिशन शक्ति: कागजों में खालीपन

अपराध रजिस्टर नंबर-4 की जांच में प्रविष्टियों की कमी और अपूर्ण विवरण मिले। मिशन शक्ति और महिला हेल्पलाइन पर आई शिकायतों की एंट्री न होने पर भी डीआईजी ने नाराजगी जताई। 44 दिनों में आई 22 शिकायतों पर कार्रवाई न होना गंभीर लापरवाही माना गया। संबंधित सीओ को अगली सुबह तक विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।

112 कॉल, घरेलू विवाद और एफआईआर मॉनिटरिंग

डीआईजी ने डायल 112 पर आई कॉल्स की संख्या और उनके निस्तारण का ब्योरा मांगा। घरेलू विवाद से जुड़ी हर शिकायत की अनिवार्य एंट्री सुनिश्चित करने को कहा। एक प्रकरण (एफआईआर संख्या 3/26) में सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद आरोपियों की पहचान से इंकार करने पर दारोगा की भूमिका पर सवाल उठाए गए और सख्त मॉनिटरिंग के आदेश दिए गए।

गुमशुदगी पर सख्ती: एक सप्ताह की मोहलत

तेलियों वाला कुआं क्षेत्र से 16 वर्षीय किशोर के लापता होने के मामले में गुमशुदगी दर्ज न करने और परिजनों से अभद्रता की शिकायत पर चौकी इंचार्ज दारोगा मनोज शर्मा को मौके पर तलब किया गया। एक सप्ताह में किशोर की बरामदगी न होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

संदेश साफ: बुनियादी जानकारी + रिकॉर्ड अनुशासन = बेहतर पुलिसिंग

निरीक्षण के अंत में डीआईजी का फोकस दो बातों पर रहा—फील्ड स्तर पर बुनियादी पेशेवर ज्ञान (जैसे शराब के मार्का की पहचान) और रिकॉर्ड-कीपिंग में अनुशासन। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों की एंट्री, कॉल मॉनिटरिंग और साक्ष्य आधारित जांच—तीनों में ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। लापरवाही पाए जाने पर रेंज कार्यालय को रिपोर्ट भेजने की चेतावनी भी दी गई।

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