कानपुर (Sun, 08 Feb 2026)। अस्सी फिल्म प्रमोशन के सिलसिले में रविवार को शहर में एक अलग-सी हलचल रही। अपनी आगामी फिल्म ‘अस्सी’ के प्रचार के लिए पहुंचे अभिनेता कुमुद मिश्रा और मोहम्मद जीशान अय्यूब ने बातचीत के दौरान न सिर्फ फिल्म के विषय पर विस्तार से बात की, बल्कि ओटीटी बनाम सिनेमा, क्षेत्रीय फिल्मों की बढ़ती ताकत और बॉलीवुड के बदलते मिजाज पर भी बेबाक राय रखी। यह फिल्म 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।
दैनिक जागरण कार्यालय में हुई इस मुलाकात में दोनों कलाकारों के शब्दों में एक सहजता थी—बिना बनावट, बिना प्रचार की अतिशयोक्ति। बातचीत का केंद्र उनकी फिल्म का संवेदनशील विषय रहा, जिसमें दुष्कर्म पीड़िता के संघर्ष, सामाजिक नजरिए और न्याय की जद्दोजहद को कथानक के मूल में रखा गया है।
संवेदनशील विषय, जिम्मेदार प्रस्तुति
कुमुद मिश्रा ने कहा कि ‘अस्सी’ किसी सनसनी के लिए नहीं, बल्कि संवेदना के लिए बनाई गई फिल्म है। “ऐसे विषय पर काम करते हुए सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह होती है कि पीड़ा का चित्रण ईमानदारी से हो, न कि उसे भुनाया जाए,” उन्होंने कहा। उनके मुताबिक, फिल्म दर्शकों को असहज जरूर करेगी, लेकिन सोचने पर मजबूर भी करेगी।
ओटीटी बनाम सिनेमा: अनुभव की बात
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने एक दिलचस्प तुलना की—“जैसे रेडियो आज भी अपनी जगह बनाए हुए है, वैसे ही सिनेमा का अनुभव अलग है। बड़े पर्दे, अंधेरे हॉल और सामूहिक भावनात्मक प्रतिक्रिया का जो असर है, वह घर की स्क्रीन पर संभव नहीं।” उनके अनुसार, ओटीटी ने कहानियों की विविधता बढ़ाई है, पर सिनेमाघर का आकर्षण कम नहीं हुआ।
बॉलीवुड बदलाव के दौर में, चिंता की नहीं
बॉलीवुड के मौजूदा दौर पर कुमुद मिश्रा ने कहा कि उद्योग एक परिवर्तनशील समय से गुजर रहा है। “हर बदलाव अपने साथ नई संभावनाएं लाता है। आज मराठी, हिंदी, अंग्रेजी—हर भाषा में सशक्त काम हो रहा है। कलाकारों के लिए दायरा बढ़ा है।” उन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा को और प्रोत्साहन देने की जरूरत पर भी जोर दिया।
हाल में फिल्मकार रोहित शेट्टी के घर पर हुई गोलीबारी की घटना को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि सुरक्षा के लिहाज से सख्ती जरूरी है।
जीशान की नजर से कानपुर: इतिहास, बातचीत और अपनापन
जीशान अय्यूब ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मैं दिल्ली का हूं, पर लखनऊ अब मेरे स्वभाव में शामिल हो चुका है।” कानपुर पर बात करते हुए उन्होंने यहां की बातचीत के अंदाज, पुराने इतिहास और लोगों की आत्मीयता की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस दौरे में उन्होंने मोतीझील और कारगिल पार्क भी देखा। “शहर को पैदल थोड़ा-थोड़ा जानना चाहिए,” उन्होंने मुस्कराते हुए जोड़ा।
दर्शकों से अपील
बातचीत के अंत में दोनों कलाकारों ने दर्शकों से 20 फरवरी को सिनेमाघरों में जाकर ‘अस्सी’ देखने की अपील की। उनके मुताबिक, यह फिल्म सिर्फ कहानी नहीं, एक सामाजिक संवाद की शुरुआत है।








