लखनऊ (Sun, 08 Feb 2026)। उत्तर प्रदेश में पर्यटन अब केवल तीर्थ-यात्रा तक सीमित नहीं रह गया है। सरकार की नई पहल ‘राही टूरिस्ट लॉज’ के जरिए धार्मिक स्थलों के साथ-साथ प्राकृतिक और शांत इलाकों में भी आधुनिक ठहराव सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं। इस पहल का नेतृत्व योगी आदित्यनाथ की सरकार कर रही है, जबकि क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (UPSTDC) के पास है। लक्ष्य साफ है—पर्यटक जहाँ जाए, वहाँ उसे स्वच्छ, सुरक्षित और भरोसेमंद आवास मिले; और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचे।
सरकार 11 जिलों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर नए लॉज और टूरिस्ट बंगले विकसित कर रही है। यह मॉडल निवेश, रखरखाव और सेवाओं की गुणवत्ता—तीनों में संतुलन बनाने की कोशिश है, ताकि सुविधाएँ टिकाऊ भी रहें और आधुनिक भी।
धार्मिक केंद्रों के पास नए ठहराव: मथुरा, आगरा, कासगंज, सीतापुर
धार्मिक पर्यटन की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए जिन स्थानों को प्राथमिकता दी गई है, वे हैं—मथुरा (गोकुलगांव), आगरा (बटेश्वर), कासगंज (सोरों) और सीतापुर। ये वे स्थल हैं जहाँ साल भर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है, लेकिन व्यवस्थित ठहराव की कमी अक्सर महसूस की जाती रही है। नए ‘राही टूरिस्ट लॉज’ इस कमी को भरेंगे।
- मथुरा के गोकुल क्षेत्र में तीर्थयात्रियों के लिए सुलभ आवास
- बटेश्वर (आगरा) में मंदिर समूह के पास पर्यटकों हेतु व्यवस्थित लॉज
- सोरों (कासगंज) और सीतापुर में धार्मिक यात्रियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित ठहराव
यहाँ लॉज बनने से यात्रियों को निजी होटलों पर निर्भरता कम होगी और मानकीकृत सेवाएँ मिलेंगी।
इको-टूरिज्म पर फोकस: एटा, हरदोई, बुलंदशहर के प्राकृतिक स्थल
धार्मिक स्थलों के साथ-साथ सरकार ने प्राकृतिक धरोहरों के पास भी लॉज बनाने का निर्णय लिया है, ताकि इको-टूरिज्म को गति मिले। एटा के पटना पक्षी विहार, हरदोई की सांडी झील और बुलंदशहर के नरौरा क्षेत्र जैसे स्थान पक्षी प्रेमियों, प्रकृति-प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
- एटा: पटना पक्षी विहार के पास बर्ड-वॉचिंग पर्यटकों के लिए लॉज
- हरदोई: सांडी झील क्षेत्र में प्रकृति पर्यटन हेतु ठहराव
- बुलंदशहर: नरौरा के गंगा तट के पास शांत आवास विकल्प
इन इलाकों में लॉज बनने से स्थानीय गाइड, नाविक, हस्तशिल्प विक्रेता और छोटे कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
अन्य जिलों में भी निर्माण: प्रतापगढ़, औरैया, बदायूं, शामली
धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के अलावा प्रतापगढ़, औरैया, बदायूं और शामली जैसे जिलों में भी नए टूरिस्ट बंगले विकसित किए जा रहे हैं। इन स्थानों पर अब तक पर्यटकों के लिए सीमित विकल्प थे। नए लॉज क्षेत्रीय पर्यटन सर्किट को जोड़ेंगे और छोटे शहरों को भी पर्यटन मानचित्र पर जगह देंगे।
प्रयागराज, वाराणसी, चित्रकूट, बलरामपुर में नवीनीकरण
नई परियोजनाओं के साथ मौजूदा ढांचे का कायाकल्प भी जारी है। प्रयागराज में होटल राही त्रिवेणी दर्शन की आवासीय क्षमता बढ़ाई गई है और राही इलावर्त का इंटीरियर नवीनीकृत किया गया है। वाराणसी (सारनाथ), चित्रकूट और बलरामपुर स्थित लॉजों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, ताकि पर्यटकों को एक समान गुणवत्ता का अनुभव मिले।
PPP मॉडल क्यों अहम है?
PPP मॉडल के तहत निजी भागीदारी से:
- रखरखाव और सेवा-गुणवत्ता बेहतर रहती है
- निवेश का बोझ सरकार पर कम पड़ता है
- स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन तेज होता है
- दीर्घकालिक संचालन अधिक पेशेवर ढंग से हो पाता है
यही कारण है कि ‘राही टूरिस्ट लॉज’ पहल को टिकाऊ पर्यटन ढांचे के रूप में देखा जा रहा है।
पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट
जहाँ लॉज बनते हैं, वहाँ केवल कमरे नहीं बनते—रोजगार, सप्लाई चेन, स्थानीय परिवहन, खानपान और हस्तशिल्प के अवसर भी बढ़ते हैं। छोटे शहरों में यह प्रभाव ज्यादा दिखाई देता है। सरकार का अनुमान है कि इन लॉजों से पर्यटन का फैलाव बड़े शहरों से निकलकर जिलों तक पहुँचेगा।
निष्कर्ष
‘राही टूरिस्ट लॉज’ योजना उत्तर प्रदेश में पर्यटन के विकेंद्रीकरण की ठोस कोशिश है। धार्मिक आस्था, प्राकृतिक शांति और आधुनिक सुविधाओं का यह संगम राज्य को व्यापक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत जगह दिलाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।








