लखनऊ (08 फ़रवरी 2026)। कभी सिर पर घड़ा, कंधे पर बाल्टी और आंखों में प्यास की आदत—बुंदेलखंड की पहचान यही थी। गर्मियों में सूखी धरती और हैंडपंप पर कतारें यहां की रोज़मर्रा की तस्वीर हुआ करती थीं। लेकिन अब दृश्य बदल चुका है। दूर से दिखती ऊंची टंकियां, गांव-गांव बिछी पाइपलाइन और आंगन में लगी टोंटी इस बात की गवाही दे रही है कि जल जीवन मिशन ने यहां पानी की सदियों पुरानी समस्या को निर्णायक मोड़ दे दिया है।
महोबा, चित्रकूट, झांसी, बांदा और हमीरपुर—इन जिलों में लाखों घरों तक नल से स्वच्छ जल पहुंचा है। इसका असर सिर्फ प्यास बुझने तक सीमित नहीं; महिलाओं की दिनचर्या बदली है, बच्चों की सेहत सुधरी है और गांवों में स्वच्छता का व्यवहार बढ़ा है।
महोबा: पांच परियोजनाएं, 1.12 लाख से अधिक घरों तक कनेक्शन
महोबा ने पानी की किल्लत के सबसे कठिन दिन देखे। कभी यहां पानी पहुंचाने के लिए ट्रेन तक चलानी पड़ी थी। आज तस्वीर उलट है। जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं से 1,12,000 से अधिक घरों को पाइपलाइन कनेक्टिविटी दी जा चुकी है। इस काम में करीब 1131 किमी सड़कों को खोदना पड़ा, जिससे अस्थायी दिक्कतें आईं, पर मरम्मत के बाद हालात सामान्य हैं।
स्थानीय निवासी अरशद कहते हैं, “काम के दौरान परेशानी हुई, लेकिन अब हर घर नल हमारे लिए बड़ी राहत है।”
चित्रकूट: सिलौटा समूह योजना से सवा लाख लोगों को राहत
चित्रकूट के पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर ब्लॉकों में सिलौटा ग्राम मुस्तकिल समूह योजना ने तस्वीर बदल दी। लगभग 1.25 लाख आबादी को लाभ मिला है। यहां 576 किमी पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य था, जिसमें 572 किमी पूरा हो चुका है।
17 ओवरहेड टैंक और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए यमुना से लाया गया पानी शुद्ध कर घरों तक पहुंचाया जा रहा है।
बरहट की ग्राम प्रधान रज्जन देवी कहती हैं, “अब बच्चे नहा-धोकर स्कूल जाते हैं, बीमारियां कम हुई हैं।”
रैपुरा योजना के तहत 19,570 परिवारों तक नल पहुंचे हैं और 60 राजस्व ग्रामों में आपूर्ति शुरू है। मदना गांव के चुनबाद यादव बताते हैं, “अपने लिए पानी जुटाना मुश्किल था, अब जानवरों तक की चिंता कम हुई है।”
झांसी: अंतिम छोर के गांवों तक पहुंची पाइपलाइन
झांसी के बड़ागांव, चिरगांव, बंगरा जैसे इलाकों में अंतिम छोर तक पाइपलाइन बिछ चुकी है। बंगरा ब्लॉक के गैरहा गांव के 65 वर्षीय कामता प्रसाद भावुक होकर कहते हैं, “यह दिन देखने को आंखें तरस गई थीं।”
पचवारा ग्राम पंचायत में करीब 1000 कनेक्शन हुए हैं। यहां के आरोग्य केंद्र और स्कूलों में भी नल लगे हैं। अधिशाषी अभियंता रणविजय सिंह के अनुसार, 42 गांवों में 11,437 कनेक्शन दिए गए हैं।
बांदा: 544 गांवों तक पहुंचा पानी
बांदा, जहां सूखा और प्यास साथ-साथ याद आते थे, अब अमलीकौर और खटान पेयजल परियोजनाओं से 544 गांवों तक पानी पहुंचा है। 82,266 घरों में कनेक्शन हो चुके हैं। बड़ोखर खुर्द के बांधा पुरवा गांव के परदेशी कहते हैं, “अब घर में ही साफ पानी मिल जाता है।”
हमीरपुर: 322 में से 320 गांव आच्छादित
हमीरपुर में दो पेयजल परियोजनाओं के जरिए 322 में से 320 गांवों तक नल से जल पहुंचाया जा रहा है। यहां यह योजना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है—हैंडपंप की कतारें इतिहास बन रही हैं।
बदलती दिनचर्या, बदलता सामाजिक जीवन
जल जीवन मिशन ने सिर्फ पानी नहीं पहुंचाया; इसने समय लौटाया है। महिलाओं के श्रम में कमी आई है, स्वच्छता की आदत बढ़ी है, बच्चों की सेहत में सुधार दिखा है। कई गांवों में यह भी कहा जा रहा है कि अब पानी की वजह से रिश्ते टूटते नहीं।
यह बदलाव टंकियों और पाइपों से आगे जाकर सामाजिक जीवन में उतर चुका है।








