नई दिल्ली (Sun, 08 Feb 2026)- Amit Shah ने छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में वामपंथी उग्रवाद पर उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने राज्यों और केंद्र की सभी सुरक्षा एजेंसियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि माओवादियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई बिखरी हुई नहीं, बल्कि एकीकृत और समन्वित होनी चाहिए। खास तौर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि शेष बचे माओवादी दबाव के चलते अन्य राज्यों में पनाह न ले सकें।
रविवार को हुई इस बैठक में सुरक्षा रणनीति, खुफिया समन्वय और जमीनी अभियानों की समीक्षा की गई। शाह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अपनाई गई सुरक्षा-केंद्रित और विकास-उन्मुख नीति के ठोस परिणाम सामने आए हैं, जिन्हें अंतिम लक्ष्य तक पहुँचाना अब प्राथमिकता है।
सुरक्षा के साथ विकास: रणनीति के दो पहिए
शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने नक्सल प्रभावित इलाकों में केवल अभियान नहीं चलाए, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के जरिए माओवाद की जड़ों पर चोट की है। उनके अनुसार, जिन क्षेत्रों को कभी नक्सली हिंसा का गढ़ माना जाता था, वे अब सड़क, शिक्षा, खेल और तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए विकास की नई पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने युवाओं का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा अब खेल, फॉरेंसिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं, साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी सहेज रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलें तो परिणाम स्थायी होते हैं।
“माओवाद अंतिम चरण में”: सख्त संदेश
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है और इसकी जड़ें तेजी से कमजोर हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस विचारधारा ने दशकों तक आदिवासी और ग्रामीण इलाकों को गरीबी, अशिक्षा और हिंसा के दुष्चक्र में फंसाए रखा। अब समय है कि इन क्षेत्रों को मुख्यधारा के विकास से पूरी तरह जोड़ा जाए।
उन्होंने एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्यों के बीच रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग हो, संयुक्त अभियान चलें और सीमा से सटे इलाकों में विशेष सतर्कता रखी जाए, ताकि किसी भी तरह का पुनर्गठन न हो सके।
बैठक में ये रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय बैठक में Vishnu Deo Sai, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक, गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा), छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, तथा केंद्रीय बलों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। इनमें Central Reserve Police Force, National Investigation Agency, Border Security Force और Indo-Tibetan Border Police के महानिदेशक भी मौजूद रहे। साथ ही छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक बैठक में शामिल हुए।
बैठक का मुख्य फोकस यही रहा कि नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य को समयसीमा के भीतर हासिल करने के लिए सभी एजेंसियां एक साझा रणनीति पर काम करें।













