लखनऊ, 09 फरवरी 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान आने वाली भीड़, सवालों और कागज़ी उलझनों को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि प्रदेश में जहां-जहां नोटिसों की सुनवाई हो रही है, वहां हेल्प डेस्क की स्थापना अब अनिवार्य होगी। इन डेस्क पर प्रशिक्षित कार्मिक तैनात रहेंगे, जो मतदाताओं की शंकाओं का समाधान करेंगे और दस्तावेज़ी प्रक्रिया में सहयोग देंगे।
हेल्प डेस्क पर स्पष्ट बैनर लगाया जाएगा और जिला व राज्य स्तरीय टोल-फ्री नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे। साथ ही, जिला स्तर पर स्थापित कॉल सेंटर की सभी लाइनों को पूर्ण रूप से सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।
1.04 करोड़ और 2.22 करोड़ नोटिसों की सुनवाई, शिष्ट व्यवहार पर जोर
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक में बताया कि:
- वर्ष 2003 की मतदाता सूची से रिकॉर्ड न मिलने पर 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी कर सुनवाई की जा रही है।
- तार्किक विसंगतियों के कारण 2.22 करोड़ मतदाताओं को भी नोटिस देकर प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
अधिकारियों को निर्देश है कि वे समय से उपस्थित रहें, मतदाताओं के साथ शिष्ट व्यवहार अपनाएं और आवश्यक सहयोग दें।
भीड़ प्रबंधन, सुविधाएं और समय निर्धारण
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि:
- सुनवाई की तिथियां ऐसी हों कि नोटिस मिलने के बाद मतदाताओं को पर्याप्त समय मिल सके।
- एक ही समय में अत्यधिक लोगों को नोटिस जारी न किए जाएं, ताकि अनावश्यक भीड़ न लगे।
- स्थलों पर कुर्सियां, पेयजल और स्वच्छ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों।
यह व्यवस्थाएं केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रक्रिया को मानवीय और सुगम बनाने की कोशिश हैं।
बीएलओ एप पर दस्तावेज़ अपलोड अनिवार्य
तार्किक विसंगतियों वाले मामलों में बीएलओ को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे:
- नोटिस देने के साथ-साथ
- मतदाता से प्राप्त दस्तावेज़, उपस्थिति और फोटो
को अनिवार्य रूप से बीएलओ एप पर अपलोड करें।
इससे सुनवाई का डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा और आगे की कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ेगी।
आकस्मिक निरीक्षण के निर्देश
रोल प्रेक्षक और जिला निर्वाचन अधिकारियों को सुनवाई स्थलों का आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी कमी को तुरंत दूर कराया जा सके। आयोग चाहता है कि एसआईआर की यह प्रक्रिया कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर व्यवस्थित, संवेदनशील और भरोसेमंद दिखे।
मतदाताओं के लिए संदेश साफ है—यदि नोटिस मिला है, तो घबराने की नहीं, हेल्प डेस्क पर जाकर सहायता लेने की जरूरत है।











