सीतापुर | Mon, 09 Feb 2026। दोपहर करीब 2 बजे सीतापुर पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने तपोधाम आश्रम में आयोजित समारोह में आध्यात्मिक विरासत, तीर्थ पुनरुद्धार और सांस्कृतिक निरंतरता पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अयोध्या और काशी का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि मथुरा और नैमिष (नैमिषारण्य) पर काम जारी है। इसी क्रम में उन्होंने पाकिस्तान स्थित हिंगलाज शक्तिपीठ की स्थिति पर भी “सोचने” की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर जीआईसी हेलीपैड पर उतरा, जहां से काफिला लगभग एक किलोमीटर दूर आश्रम तक संकरी गलियों से होकर पहुंचा। कार्यक्रम के मद्देनज़र सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम रहे और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
लोकार्पण, पूजन और गुरु-परंपरा का स्मरण
आश्रम पहुंचने पर महंत तेजनाथ महाराज और संतजनों ने स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने गोरख अमृत धारा फव्वारे और सेवाभारती सभागार का लोकार्पण किया, शिलापट का अनावरण किया तथा पूजन-अर्चन में भाग लिया। संबोधन की शुरुआत उन्होंने नाथपंथ से जुड़े संतों को नमन करते हुए की और अपनी गुरु-परंपरा का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि इस तपोस्थली को पूर्वज आचार्यों ने साधना से प्रतिष्ठित किया, जिसकी परंपरा आज भी जीवित है।
नैमिषारण्य पुनर्स्थापना का जिक्र
योगी ने कहा कि सरकार नैमिषारण्य के पुनर्स्थापन का बड़ा कार्यक्रम हाथ में लिए हुए है। उनके अनुसार, यह वही पावन स्थल माना जाता है जहां प्राचीन काल में ऋषियों ने वैदिक-पुराणिक परंपरा को लिपिबद्ध करने का महान कार्य किया। इस सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित और सुव्यवस्थित रूप देने का प्रयास जारी है।
“पूर्व में कामाख्या, पश्चिम में हिंगलाज”—शक्तिपीठों का संदर्भ
संत परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे पूर्वोत्तर में कामाख्या मंदिर का महत्व है, वैसे ही पश्चिम में हिंगलाज माता मंदिर (हिंगलाज शक्तिपीठ) की मान्यता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में स्थित होने के कारण अनेक श्रद्धालु वहां नहीं जा पाते—इस स्थिति पर भी विचार होना चाहिए। उनके इस वक्तव्य को कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ध्यान से सुना।
अयोध्या-काशी पूरी, मथुरा पर कार्य जारी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या और काशी (वाराणसी) से जुड़े कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि मथुरा और नैमिष क्षेत्र में काम प्रगति पर है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और तीर्थ अवसंरचना (infrastructure) सुदृढ़ करने की निरंतर प्रक्रिया बताया।
साधना-गुफा और तपोस्थली की कथा
योगी ने तपोधाम की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सिद्ध साधकों ने गुफा बनाकर वर्षों तप किया और गुरु-शिष्य परंपरा से इस स्थल की पहचान बनी। उन्होंने इसे ऐसी तपोभूमि बताया, जहां साधना की विरासत आज भी लोगों को जोड़ती है।
कार्यक्रम की झलकियां
- गोरख अमृत धारा फव्वारे और सभागार का लोकार्पण
- शिलापट अनावरण, पूजन-अर्चन
- संतजनों का सम्मान, गुरु-परंपरा का स्मरण
- नैमिषारण्य पुनर्स्थापना और शक्तिपीठों का संदर्भ
मुख्यमंत्री के भाषण का केंद्रीय स्वर यही रहा कि तीर्थों का संरक्षण केवल आस्था नहीं, सांस्कृतिक निरंतरता का दायित्व भी है—और इसी कड़ी में उन्होंने हिंगलाज देवी के संदर्भ को रेखांकित किया।








