लखनऊ | 09 फरवरी 2026 — आगामी विधानसभा सत्र को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों की व्यापक समीक्षा की गई। केशव प्रसाद मौर्य ने गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि विधान भवन परिसर के भीतर और बाहर सख्त सुरक्षा रहे, लेकिन आम नागरिकों की आवाजाही और दैनिक गतिविधियों में न्यूनतम असुविधा सुनिश्चित की जाए। स्पष्ट चेतावनी भी दी गई—सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं होगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
रविवार को विधान भवन स्थित उपमुख्यमंत्री कार्यालय में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में मौर्य ने कहा कि सुरक्षा के साथ प्रशासनिक तैयारी भी उतनी ही मजबूत हो। गृह विभाग से जुड़े प्रश्नों के सटीक और समयबद्ध उत्तर तैयार रखने के निर्देश दिए गए, ताकि सदन में उठने वाले मुद्दों पर सरकार का पक्ष तथ्यों के साथ रखा जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं निगरानी करने को कहा गया।
विधान भवन के भीतर-बाहर सख्ती, संवेदनशील स्थलों पर विशेष नजर
मौर्य ने निर्देश दिए कि संवेदनशील स्थलों, खासकर विधान भवन परिधि में अतिरिक्त तैनाती, बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया दल सक्रिय रहें। साथ ही ट्रैफिक डायवर्जन और मार्गदर्शन ऐसा हो कि आम जनता को अनावश्यक दिक्कत न हो।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर जोर, ऑनलाइन गेम्स और डिजिटल अरेस्ट पर कार्रवाई
कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले ऑनलाइन गेम्स पर कड़ी निगरानी रखने, तथा संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया।
इसके साथ ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों में प्रत्येक जिले में प्रशिक्षित अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि साइबर ठगी के इस नए पैटर्न पर समय रहते अंकुश लगाया जा सके।
चाइनीज मांझा पर पूर्ण प्रतिबंध, बौद्ध स्थलों पर विशेष सुरक्षा
चाइनीज मांझा के क्रय-विक्रय और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। साथ ही कुशीनगर और सारनाथ जैसे बौद्ध स्थलों पर विशेष सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने को कहा गया, जहां देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं।
प्रशासनिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी
मौर्य ने यह भी कहा कि सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों पर सरकार की ओर से पारदर्शिता और तथ्यों के साथ जवाब दिया जाए। प्रयागराज में आपात परिस्थितियों के दौरान सहायता कार्यों में योगदान देने वाले कार्मिकों को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए।
संदेश साफ है—विधानसभा सत्र सुरक्षा केवल पुलिस बंदोबस्त तक सीमित नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, साइबर सतर्कता, सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही—सभी को साथ लेकर चलने की तैयारी है।








