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इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन पर वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी: CM योगी ने PPP मॉडल से निजी भागीदारी बढ़ाने के दिए निर्देश

On: February 9, 2026
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CM योगी ने PPP मॉडल से निजी भागीदारी बढ़ाने के दिए निर्देश
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लखनऊ | 09 फरवरी 2026 (सोमवार) — उत्तर प्रदेश में प्रकृति, रोजगार और निवेश को एक साथ जोड़ने की नई रूपरेखा सामने आई है। योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि चुने हुए इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन पर निजी क्षेत्र की भागीदारी से वर्ल्ड क्लास सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले। यह दिशा-निर्देश उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड की बैठक में दिए गए, जहां समयबद्ध कार्ययोजना, PPP मॉडल और सामुदायिक भागीदारी पर जोर रहा।

इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन: संरक्षण, रोजगार और निवेश का संगम

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की जैवविविधता, वेटलैंड्स, झीलें, वन्यजीव और नदी तंत्र केवल दर्शनीय स्थल नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक धुरी हैं। चयनित स्थलों पर बेहतर होटल, स्तरीय रेस्टोरेंट, गुणवत्तापूर्ण आवास और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा। मॉडल ऐसा हो, जो सस्टेनेबल (Sustainable) भी हो और स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार भी पैदा करे।

PPP मॉडल से चुने गए संभावनाशील स्थल

पीपीपी (Public-Private Partnership) के जरिए जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई, उनमें कुसम्ही जंगल, अयोध्या का कुमारगंज क्षेत्र, गाजीपुर का कामाख्या वन पार्क और लखीमपुर खीरी की महेशपुर रेंज शामिल हैं। इन स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से पर्यटक सुविधाएं विकसित होंगी, ताकि प्रकृति के बीच आरामदेह और जिम्मेदार पर्यटन अनुभव मिल सके।

पहले से जारी 44 प्रोजेक्ट, अब मॉनेटाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस

वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य और रानीपुर टाइगर रिजर्व सहित हैदरपुर, बखिरा, सूर सरोवर, समसपुर और नवाबगंज जैसे वेटलैंड्स में 44 इको-टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए जा चुके हैं। अब बोर्ड इन परिसंपत्तियों के मॉनेटाइजेशन (Monetization) और दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी पर काम कर रहा है—इको लॉज, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और अन्य सुविधाएं PPP के जरिए विकसित की जाएंगी।

कनेक्टिविटी सुधार: वीकेंड AC बस सेवा का प्रस्ताव

पर्यटकों की पहुंच आसान बनाने के लिए लखनऊ–पलिया और नई दिल्ली–पलिया के बीच वीकेंड AC बस सेवा चलाने का सुझाव दिया गया। साथ ही पीलीभीत–मैलाानी–बहराइच क्षेत्रीय बस सेवा शुरू करने के निर्देश दिए गए, ताकि इको-टूरिज्म स्थलों तक निर्बाध कनेक्टिविटी बने।

2025-26 के लिए 31 नई परियोजनाएं

अयोध्या, आगरा, गोरखपुर, लखनऊ, चित्रकूट, महराजगंज, प्रयागराज, बांदा, बहराइच, सीतापुर, उन्नाव, बलिया, इटावा और मैनपुरी समेत कई जिलों में इंटरप्रिटेशन सेंटर, बर्ड वॉचिंग टॉवर, नेचर ट्रेल्स, कैंपिंग साइट और वेटलैंड विकास जैसी 31 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। बोर्ड एक AI चैटबॉट और मोबाइल एप भी विकसित कर रहा है, जिससे पर्यटकों को मार्गदर्शन और बुकिंग सहायता मिल सके।

बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह सहित वित्त मंत्री, कृषि मंत्री, जलशक्ति मंत्री और वन एवं पर्यावरण मंत्री की उपस्थिति रही।

निष्कर्ष:
राज्य सरकार का लक्ष्य साफ है—इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन को ऐसा मॉडल बनाना, जहां प्रकृति सुरक्षित रहे, स्थानीय समुदाय साझेदार बने और निजी निवेश से विश्वस्तरीय सुविधाएं खड़ी हों। उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म को संरक्षण और समृद्धि के साझा सूत्र में पिरोने की दिशा में तेज कदम बढ़ा रहा है।

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