लखनऊ, 12 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश की सियासत और अर्थव्यवस्था—दोनों के लिए गुरुवार का दिन अहम रहा। योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9.12 लाख करोड़ रुपये का विशाल बजट पेश कर दिया। यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज भी है। इस बार खास फोकस UP Budget 2026 के जरिए राज्य को राजस्व के मामले में और अधिक आत्मनिर्भर बनाने पर दिखा।
सरकार ने साफ किया है कि अगले वित्तीय वर्ष में वह अपने कर राजस्व से 3.35 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह संकेत है कि राज्य अब केंद्र पर निर्भरता कम करते हुए अपनी आर्थिक क्षमता को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
पूंजीगत परिव्यय पर 1.78 लाख करोड़ रुपये खर्च
UP Budget 2026 में विकास कार्यों और परिसंपत्तियों के सृजन—यानी पूंजीगत परिव्यय—पर 1.78 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह राशि राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 4.47 प्रतिशत है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पूंजीगत खर्च बढ़ाने से सड़क, पुल, बिजली, सिंचाई, औद्योगिक ढांचे और शहरी बुनियादी सुविधाओं में तेजी आती है। इसका सीधा असर रोजगार और निवेश पर पड़ता है। यही वजह है कि सरकार ने इस मद में बड़ी रकम आवंटित की है।
राजस्व का गणित: कहां से आएगा पैसा?
बजट जितना बड़ा, उसका संसाधन प्रबंधन उतना ही अहम। सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
- स्वयं का कर राजस्व: 3.35 लाख करोड़ रुपये (लक्ष्य)
- केंद्रीय करों में हिस्सेदारी: 2.68 लाख करोड़ रुपये
- केंद्र से सहायता अनुदान: 98,772 करोड़ रुपये
- करेत्तर राजस्व: 26,754 करोड़ रुपये
यह आंकड़े बताते हैं कि राज्य की कुल आय का बड़ा हिस्सा अब आंतरिक स्रोतों से आएगा। विशेषकर कर संग्रह में सुधार, जीएसटी अनुपालन और डिजिटल निगरानी के जरिए राजस्व बढ़ाने की योजना है।
आत्मनिर्भरता की ओर संकेत
UP Budget 2026 में कर राजस्व का लक्ष्य बढ़ाना केवल वित्तीय मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में औद्योगिक निवेश, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और नई मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के कारण कर आधार (tax base) विस्तृत हुआ है। सरकार इसी रफ्तार को आगे बढ़ाना चाहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 3.35 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जो अपनी आय का बड़ा हिस्सा खुद जुटाने में सक्षम हैं।
विकास और चुनावी वर्ष का संतुलन
राजनीतिक दृष्टि से भी यह बजट अहम माना जा रहा है। एक ओर सरकार बुनियादी ढांचे पर जोर दे रही है, दूसरी ओर सामाजिक योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों को भी जारी रखने का संकेत है। हालांकि इस बजट में सबसे ज्यादा चर्चा पूंजीगत खर्च और कर राजस्व लक्ष्य को लेकर हो रही है।
आर्थिक अनुशासन की परीक्षा
इतने बड़े बजट के साथ चुनौती भी कम नहीं है। कर संग्रह लक्ष्य हासिल करना, राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना और खर्च की गुणवत्ता बनाए रखना—तीनों मोर्चों पर सरकार की परीक्षा होगी।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो UP Budget 2026 उत्तर प्रदेश को देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में मजबूत स्थिति दिला सकता है।
निष्कर्ष
9.12 लाख करोड़ रुपये का बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य की विकास यात्रा का रोडमैप है। 3.35 लाख करोड़ रुपये के कर राजस्व लक्ष्य के साथ सरकार ने साफ कर दिया है कि अब उत्तर प्रदेश ‘राजस्व सशक्तिकरण’ की राह पर आगे बढ़ना चाहता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य किस हद तक धरातल पर उतर पाता है।











