नई दिल्ली (12 फरवरी 2026)। देश के सबसे दर्दनाक विमान हादसों में गिने जाने वाले AI-171 हादसे की जांच जारी है। इसी बीच इटली की एक मीडिया रिपोर्ट में पायलट पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने साफ शब्दों में कहा है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों में जो दावे किए गए हैं, वे अटकलों पर आधारित हैं। मंत्रालय के मुताबिक, जांच एक तकनीकी, बहु-स्तरीय और साक्ष्य-आधारित प्रक्रिया है—जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पूरा किया जाता है।
इतालवी मीडिया का दावा और उससे उठे सवाल
इटली के प्रतिष्ठित अखबार Corriere della Sera ने अपनी रिपोर्ट में पश्चिमी विमानन एजेंसियों के सूत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि विमान के ईंधन स्विच में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि संभवतः एक पायलट ने जानबूझकर दोनों फ्यूल स्विच बंद कर दिए थे, जिससे विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
हालांकि, इन दावों पर भारत की जांच एजेंसी ने सख्त रुख अपनाया है। AAIB का कहना है कि जब तक अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं होती, तब तक किसी भी निष्कर्ष को सार्वजनिक करना या किसी व्यक्ति विशेष पर दोष मढ़ना न तो न्यायसंगत है और न ही पेशेवर।
‘सबूतों पर आधारित होती है जांच प्रक्रिया’
AAIB ने अपने बयान में कहा कि विमान दुर्घटनाओं की जांच एक अत्यंत तकनीकी (technical) और साक्ष्य-आधारित (evidence-based) प्रक्रिया होती है। इसका उद्देश्य केवल दोष तय करना नहीं, बल्कि दुर्घटना के मूल कारण (root cause) को समझना और भविष्य में सुरक्षा सुधार (safety enhancement) सुनिश्चित करना होता है।
जांच विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम, 2025 और International Civil Aviation Organization (ICAO) के अनुलग्नक-13 (Annex 13) के अनुसार की जा रही है।
एजेंसी ने यह भी बताया कि 12 जुलाई 2025 को जारी की गई प्रारंभिक रिपोर्ट (Preliminary Report) उस समय उपलब्ध तथ्यों पर आधारित थी। अंतिम रिपोर्ट—जिसमें निष्कर्ष और सुरक्षा संबंधी सिफारिशें होंगी—जांच पूरी होने के बाद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सार्वजनिक की जाएगी।
शुरुआती रिपोर्ट में क्या सामने आया था?
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, टेक-ऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई लगभग एक सेकंड के अंतराल में बंद हो गई थी। इससे कॉकपिट में भ्रम (confusion) की स्थिति पैदा हो गई।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग (Cockpit Voice Recorder) में एक पायलट दूसरे से पूछता हुआ सुनाई देता है—“तुमने कट क्यों किया?”—जिस पर दूसरा पायलट जवाब देता है कि उसने ऐसा नहीं किया।
यह संवाद कई सवाल छोड़ गया, लेकिन जांच एजेंसी ने तब भी स्पष्ट किया था कि यह सिर्फ प्रारंभिक जानकारी है और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा मुद्दा
बुधवार को Supreme Court of India ने केंद्र सरकार से अब तक अपनाए गए प्रक्रियात्मक प्रोटोकॉल पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। कोर्ट को बताया गया था कि जांच अंतिम चरण में है। हालांकि, AAIB के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रक्रिया अभी जारी है और आधिकारिक निष्कर्ष शेष है।
अहमदाबाद में हुआ था भीषण हादसा
Air India की फ्लाइट AI-171, 12 जून 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस भयावह हादसे में कुल 260 लोगों की जान चली गई।
मृतकों में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे। इसके अलावा दुर्घटनास्थल पर मौजूद 19 स्थानीय लोगों की भी मौत हुई। यह त्रासदी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं थी—इसने सैकड़ों परिवारों की दुनिया उजाड़ दी।
‘अनुमान आधारित रिपोर्टिंग से बचें’
AAIB ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे संयम बरतें। एजेंसी के अनुसार, अपुष्ट या अनुमान-आधारित खबरें (speculative reporting) न केवल जनता में अनावश्यक चिंता पैदा करती हैं, बल्कि पेशेवर जांच की विश्वसनीयता (credibility) को भी प्रभावित कर सकती हैं।
एजेंसी ने दोहराया कि वह पारदर्शिता (transparency), प्रक्रिया की शुचिता (integrity) और उच्चतम विमानन सुरक्षा मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष: सच सामने आएगा, लेकिन समय से
AI-171 हादसे की जांच जारी है—और यही इस समय का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच प्रक्रियाएं समय लेती हैं, पर उनका उद्देश्य सच्चाई तक पहुंचना और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकना होता है।
जब तक अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक किसी पायलट, तकनीकी दल या प्रणाली पर आरोप तय करना न्याय और पेशेवर मानकों—दोनों के खिलाफ होगा।
हादसे में जान गंवाने वालों के परिवार आज भी जवाब की प्रतीक्षा में हैं। ऐसे में संवेदनशील और जिम्मेदार पत्रकारिता ही समय की मांग है।











