नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026। राइड-हेलिंग बाजार में निजी एग्रीगेटर कंपनियों के दबदबे के बीच केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने सोमवार को सहकारी मॉडल पर आधारित नई कैब सेवा भारत टैक्सी को औपचारिक रूप से लॉन्च करते हुए बड़ा ऐलान किया। उनका दावा है—इस प्लेटफॉर्म पर कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा, हर किलोमीटर का न्यूनतम फिक्स किराया तय होगा और कुल आय का 80 प्रतिशत सीधे ड्राइवरों को मिलेगा।
सरकार इसे सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट सेवा नहीं, बल्कि “सहकारी आंदोलन” के विस्तार के रूप में पेश कर रही है।
भारत टैक्सी का मॉडल: 80% आय ड्राइवरों के नाम
शाह ने संवाद कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि भारत टैक्सी की कुल कमाई का 80% हिस्सा ड्राइवरों को उनकी तय की गई दूरी के आधार पर दिया जाएगा। शेष 20% राशि सहकारी पूंजी के रूप में रखी जाएगी, जिसका उपयोग शुरुआती तीन वर्षों में विस्तार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में होगा।
उन्होंने कहा कि किराया निर्धारण वाहन लागत, ईंधन खर्च और न्यूनतम लाभ (minimum viable margin) को ध्यान में रखकर किया जाएगा—इससे नीचे सेवा संचालित नहीं होगी।
यहां उनका सीधा इशारा उन निजी कंपनियों की ओर था, जो आमतौर पर 25–30% तक कमीशन लेती हैं, जिससे ड्राइवरों की वास्तविक आय प्रभावित होती है।
दो वर्षों में 15 करोड़ ड्राइवर जोड़ने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है—
- दो वर्षों में 15 करोड़ ड्राइवरों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ना
- तीन वर्षों में देश के सभी नगर निगम वाले शहरों में सेवा का विस्तार
फिलहाल सेवा दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के राजकोट में संचालित हो रही है।
ड्राइवर 500 रुपये का शेयर खरीदकर सह-स्वामी (co-owner) बन सकेंगे। भविष्य में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में उनके प्रतिनिधियों के लिए सीट आरक्षित करने की भी योजना है, ताकि नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
अमूल मॉडल से प्रेरणा
शाह ने सहकारिता के सफल उदाहरण के तौर पर Amul का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह अमूल ने दुग्ध उत्पादकों को लाभ में साझेदार बनाया, उसी तर्ज पर भारत टैक्सी भी श्रमिकों को मुनाफे में भागीदार बनाएगी।
उनके शब्दों में, “यह बाजार में प्रतिस्पर्धा करने से अधिक श्रम की गरिमा स्थापित करने का प्रयास है।”
‘सारथी दीदी’ फीचर और सुरक्षा प्रावधान
महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘सारथी दीदी’ फीचर जोड़ा गया है। इसके तहत अकेली महिला यात्री महिला चालक को प्राथमिकता दे सकेंगी।
इसके अलावा:
- तीन-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र (ऑनलाइन, कॉल सेंटर, भौतिक केंद्र)
- ऐप नोटिफिकेशन के जरिए नीतिगत बदलावों की पूर्व सूचना
- सहकारी बैंकों के माध्यम से आसान ऋण व बीमा सुविधा
इन प्रावधानों को पारदर्शिता (transparency) और जवाबदेही (accountability) की दिशा में कदम बताया गया।
‘ड्राइवर’ नहीं, ‘सारथी’ कहिए
संवाद के दौरान शाह ने ड्राइवरों से स्वयं को “ड्राइवर” की बजाय “सारथी” कहने का आग्रह किया। उनका कहना था कि शब्दों का चयन भी सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा होता है।
यह पहल ऐसे समय में आई है जब निजी एग्रीगेटर मॉडल में आय अस्थिरता, कमीशन कटौती और प्रोत्साहन नीति को लेकर असंतोष की आवाजें उठती रही हैं।
क्या बदलेगा राइड-हेलिंग बाजार?
यदि भारत टैक्सी का न्यूनतम किराया और लाभ-साझेदारी मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो यह मौजूदा एग्रीगेटर कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है।
सवाल अब यह है—क्या सहकारी ढांचा तेज़ी से बदलते डिजिटल परिवहन बाजार में टिकाऊ साबित होगा? या फिर यह प्रयोग भी नीतिगत उत्साह तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल सरकार का संदेश साफ है—
बाजार केवल मुनाफे से नहीं, साझेदारी से भी चलता है।












