तिरुवल्ला (केरल), 4 अप्रैल 2026। चुनावी माहौल के बीच केरल रैली पीएम मोदी का राजनीतिक संदेश साफ और आक्रामक नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को केरल में भाजपा की रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस और वामपंथी दलों पर तीखा निशाना साधा और लोगों से इनसे “सावधान रहने” की अपील की।
उनके भाषण में विकास, राजनीतिक बदलाव और सांस्कृतिक जुड़ाव—तीनों की झलक साफ दिखी, जो इस चुनाव को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि दिशा परिवर्तन के रूप में पेश करने की कोशिश भी थी।
🔶 केरल में बदलाव का माहौल, NDA सरकार का दावा
प्रधानमंत्री ने रैली में कहा कि राज्य में इस बार माहौल बदल चुका है और जनता परिवर्तन चाहती है। उन्होंने विश्वास जताया कि 9 अप्रैल को मतदान के बाद 4 मई को एनडीए सरकार बनेगी।
उनका दावा था कि राज्यभर में लोगों, खासकर महिलाओं के बीच, एनडीए के पक्ष में स्पष्ट समर्थन देखने को मिल रहा है।
उन्होंने कहा, “यह चुनाव केवल सरकार बदलने का नहीं, बल्कि केरल की संभावनाओं को सही दिशा देने का अवसर है।”
🔶 कांग्रेस और लेफ्ट पर सीधा हमला
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) पर विकास की अनदेखी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि केरल प्राकृतिक संसाधनों, ब्लू इकोनॉमी, उद्योग और पर्यटन के लिहाज से बेहद समृद्ध है, लेकिन इन संभावनाओं का सही उपयोग नहीं हो पाया।
उनके अनुसार, “राजनीतिक हितों ने विकास को पीछे धकेल दिया, जिसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ी है।”
🔶 अनूप के समर्थन में वोट की अपील
रैली में प्रधानमंत्री ने एनडीए उम्मीदवार अनूप के लिए जोरदार समर्थन मांगा।
उन्होंने उन्हें एक समर्पित, शांत और मेहनती कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से वे पूरी ईमानदारी के साथ काम कर रहे हैं।
पीएम ने कहा कि केरल को ऐसे युवा नेतृत्व की जरूरत है और अब जनता को तय करना है कि वह विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है या नहीं।
🔶 “मेरा बूथ सबसे मजबूत” अभियान का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने लोकप्रिय अभियान “मेरा बूथ सबसे मजबूत” का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि हाल ही में केरल में 5000 शक्ति केंद्रों से 1.25 लाख से अधिक कार्यकर्ता इस अभियान में जुड़े।
उनके मुताबिक, कार्यकर्ताओं का स्पष्ट संदेश था कि राज्य की जनता अब बदलाव के मूड में है और एलडीएफ सरकार को हटाने का मन बना चुकी है।
🔶 बुनियादी सुविधाओं और फंडिंग पर उठाए सवाल
पीएम मोदी ने राज्य की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी विपक्षी सरकारों को घेरा।
उन्होंने कहा कि:
- कई क्षेत्रों में सड़कें खराब हालत में हैं
- वर्षों से नए पुलों का निर्माण नहीं हुआ
- मेडिकल कॉलेजों की स्थिति चिंताजनक है
उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार ने केरल को पहले के मुकाबले पांच गुना अधिक फंड दिया है, लेकिन उसका सही उपयोग नहीं हुआ।
🔶 सांस्कृतिक जुड़ाव और विकास का संतुलन
रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने सबरीमाला और भगवान अयप्पा का उल्लेख कर सांस्कृतिक भावनाओं को भी जोड़ा।
उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान और आस्था का सम्मान भी जरूरी है—जो चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
📊 राजनीतिक संदेश क्या है?
केरल रैली पीएम मोदी से तीन बड़े संकेत निकलते हैं:
- विकास बनाम परंपरागत राजनीति का नैरेटिव
- कांग्रेस और लेफ्ट के खिलाफ सीधा ध्रुवीकरण
- एनडीए के लिए पहली बार गंभीर सत्ता दावेदारी
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह रैली केवल प्रचार नहीं, बल्कि केरल की राजनीति में एक नई बहस की शुरुआत भी है।












