नई दिल्ली/लखनऊ (06 अप्रैल 2026)। उत्तर प्रदेश में किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत कर दी है, जो आज से लेकर 15 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में चलेगा।
इस अभियान के तहत हर ग्राम सचिवालय में विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं, जहां किसानों का ऑन-द-स्पॉट पंजीकरण किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि कोई भी पात्र किसान योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए — खासकर डिजिटल प्रक्रियाओं की वजह से।
गांव-गांव पहुंचने की रणनीति, कागजों की दिक्कत यहीं खत्म
सरकारी योजनाओं तक पहुंच में सबसे बड़ी बाधा अक्सर दस्तावेजों की कमी या नाम में त्रुटियां बनती हैं। इस बार प्रशासन ने इसे जमीनी स्तर पर हल करने का फैसला किया है।
कैंप में मौजूद अधिकारी किसानों को जरूरी दस्तावेजों की जानकारी देंगे, वहीं मौके पर ही रजिस्ट्रेशन और नाम सुधार की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र की हर ग्राम पंचायत के कम से कम एक कैंप में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। साथ ही ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव भी इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होंगे।
पीएम किसान योजना से जुड़ाव बढ़ाने पर फोकस
इस उत्तर प्रदेश फार्मर रजिस्ट्री अभियान का एक बड़ा लक्ष्य किसानों को Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Yojana जैसी योजनाओं से सीधे जोड़ना है।
अब तक प्रदेश में 1,72,06,355 किसानों को इस योजना के तहत रजिस्ट्री से जोड़ा जा चुका है। लेकिन सरकार मानती है कि अभी भी बड़ी संख्या में किसान इस दायरे से बाहर हैं — खासकर छोटे और सीमांत किसान।
यही वजह है कि इस बार अभियान को सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि “मिशन मोड” में चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
पारदर्शिता और तेजी: दोनों पर एक साथ जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है। असल मकसद एक सटीक और अपडेटेड किसान डाटाबेस तैयार करना है, जिससे भविष्य में योजनाओं का क्रियान्वयन और तेज तथा पारदर्शी हो सके।
जब डेटा सही होगा, तो लाभ सीधे किसान के खाते तक पहुंचेगा — बीच में देरी या गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी।
सरकार की मंशा साफ, अब नजर अमल पर
राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि तय समयसीमा के भीतर अधिकतम किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।
अब असली परीक्षा जमीनी स्तर पर होगी — क्या यह अभियान वास्तव में हर उस किसान तक पहुंच पाएगा, जो अभी भी सिस्टम से बाहर है?
फिलहाल, गांवों में लग रहे ये कैंप किसानों के लिए एक मौके की तरह हैं — जहां सिर्फ फॉर्म नहीं भरेंगे, बल्कि सरकारी योजनाओं से उनका सीधा रिश्ता भी मजबूत होगा।









