गोरखपुर, 6 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में पत्रकारिता की बदलती भूमिका और उसकी जिम्मेदारियों पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज के दौर में पत्रकारिता में समन्वय बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि सूचना के कई माध्यम एक ही खबर को अलग-अलग तरीके से पेश कर रहे हैं, जिससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
पत्रकारिता में समन्वय से ही बनेगा जन-विश्वास मजबूत
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रिंट, विजुअल, डिजिटल और सोशल मीडिया के बीच तालमेल की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनका कहना था कि यदि एक ही तथ्य को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भिन्न दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाएगा, तो यह न केवल भ्रम पैदा करेगा बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता को भी कमजोर करेगा।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को अपने मूल्यों, मानकों और आदर्शों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। विशेष रूप से सोशल मीडिया को भी पारंपरिक मीडिया की आचार संहिता से जोड़ना समय की मांग है।
आत्म-नियमन और मूल्यों पर आधारित हो पत्रकारिता
सीएम योगी ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा राष्ट्र सेवा और समाज सेवा की भावना से प्रेरित रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मीडिया के कुछ हिस्से समाज को गुमराह करने का प्रयास करते हैं, जिससे अशांति फैल सकती है। ऐसे तत्वों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
उनका यह भी कहना था कि जब पत्रकारिता सही तथ्यों के साथ आम लोगों की आवाज बनती है, तभी वह जन-विश्वास का मजबूत आधार तैयार करती है।
आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, व्यक्तिगत नहीं
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र में संवाद की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आलोचना को व्यक्तिगत दुश्मनी के रूप में नहीं लेना चाहिए। पत्रकारिता समाज का आईना है और उसकी जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्षता के साथ मुद्दों को प्रस्तुत करे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाना जन-विश्वास को नुकसान पहुंचाता है।
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: एक ऐतिहासिक पड़ाव
इस वर्ष को हिंदी पत्रकारिता के लिए ऐतिहासिक बताते हुए मुख्यमंत्री ने 30 मई 1826 को कोलकाता से प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र Udant Martand का उल्लेख किया, जिसे जुगुल किशोर शुक्ल ने शुरू किया था। उन्होंने कहा कि तब देश गुलाम था, लेकिन पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान व्यक्तित्वों ने भी पत्रकारिता को समाज जागरण का माध्यम बनाया।
विघटनकारी शक्तियों से सावधान रहने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें उपनिषदों के “सत्यमेव जयते” सिद्धांत में निहित हैं। इसके बावजूद विघटनकारी शक्तियां समय-समय पर इसकी स्वतंत्रता को प्रभावित करने का प्रयास करती रही हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद पत्रकारिता को सत्य के मार्ग पर अडिग रहना होगा।
गोरखपुर की भूमिका और पत्रकारिता की जिम्मेदारी
सीएम योगी ने बताया कि लगभग तीन करोड़ की आबादी शिक्षा, व्यापार और रोजगार के लिए गोरखपुर पर निर्भर है। ऐसे में यहां की पत्रकारिता की दिशा राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने वाली होनी चाहिए।
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मीडिया की भूमिका को भी अहम बताया।
नई कार्यकारिणी ने ली शपथ, कई गणमान्य रहे मौजूद
कार्यक्रम में गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी को शपथ दिलाई। अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, उपाध्यक्ष धनेश कुमार, महामंत्री पंकज श्रीवास्तव समेत अन्य पदाधिकारियों ने जिम्मेदारी संभाली।
इस अवसर पर सांसद Ravi Kishan, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।









