लखनऊ, 09 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उठ रही शिकायतों ने आखिरकार सरकार को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। स्मार्ट मीटर ओवरबिलिंग जांच अब सरकार की प्राथमिकता बन चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ शब्दों में संकेत दे दिया है कि उपभोक्ताओं के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गुरुवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने ओवरबिलिंग की शिकायतों की गहन जांच के निर्देश देते हुए विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का फैसला लिया। यह समिति यह जांच करेगी कि कहीं तकनीकी खामियों या अन्य कारणों से उपभोक्ताओं को गलत बिल तो नहीं भेजे जा रहे।
“ईमानदार उपभोक्ता को सजा नहीं” — सरकार का स्पष्ट संदेश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण बात कही—आम उपभोक्ता मूलतः ईमानदार होता है। यदि उसे सही और समय पर बिल मिले, तो वह भुगतान करने से पीछे नहीं हटता।
यही कारण है कि सरकार अब इस बात को सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी निर्दोष उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन केवल बिलिंग गड़बड़ी के कारण न काटा जाए।
यह बयान उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है, जो पिछले कुछ समय से बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर परेशान थे।
जांच के साथ-साथ सिस्टम सुधार पर भी जोर
सीएम योगी ने केवल जांच तक सीमित रहने के बजाय पूरे सिस्टम को दुरुस्त करने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि—
- बिजली आपूर्ति निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण हो
- तकनीकी दक्षता (technical efficiency) बढ़ाई जाए
- लाइन लॉस में कमी लाई जाए
- उपभोक्ता सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए
सरकार का फोकस साफ है—ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों का लाभ सीधे अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचे, न कि सिर्फ कागजों में सीमित रहे।
बिलिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाने की कवायद
स्मार्ट मीटर ओवरबिलिंग जांच के तहत सबसे बड़ा बदलाव बिलिंग और भुगतान प्रणाली में देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि—
- हर उपभोक्ता को समय पर और सटीक बिल मिले
- स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम उपभोक्ता के विश्वास के अनुरूप हो
- शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण किया जाए
यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में बिजली बिलिंग से जुड़ी शिकायतों में कमी लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
फील्ड में उतरेंगे मंत्री और अधिकारी
सीएम योगी ने ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को निर्देश दिया कि वे खुद फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें।
इसके अलावा, टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों को पूरी तरह सक्रिय रखने और शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
उपभोक्ताओं के लिए राहत, लेकिन नजर रहेगी क्रियान्वयन पर
राज्य सरकार का यह कदम निश्चित रूप से आम उपभोक्ताओं को राहत देने वाला है। लेकिन असली असर तभी दिखेगा, जब जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ठोस कार्रवाई होगी और सिस्टम में वास्तविक सुधार नजर आएंगे।
फिलहाल इतना तय है कि स्मार्ट मीटर ओवरबिलिंग जांच के जरिए सरकार ने यह संदेश दे दिया है—बिजली उपभोक्ताओं के साथ किसी भी तरह की लापरवाही अब नहीं चलेगी।










