नई दिल्ली/30 जुलाई 2026: भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में शुमार अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रतिस्पर्धी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। अपने शांत स्वभाव, शानदार तकनीक और विदेशी परिस्थितियों में दमदार बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले रहाणे ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा कर अपने 15 साल लंबे क्रिकेट सफर को विराम दिया। उनके संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे अध्याय का अंत हुआ, जिसने विदेशों में कई ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखी।
विदेशी पिचों के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज को क्रिकेट ने कहा अलविदा
31 अगस्त 2011 को इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच से करियर की शुरुआत करने वाले अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। खासकर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्होंने कई ऐसी पारियां खेलीं, जिन्होंने भारत को मुश्किल हालात से बाहर निकाला।
साल 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। एडिलेड टेस्ट में शर्मनाक हार और विराट कोहली की अनुपस्थिति के बाद रहाणे ने कप्तानी संभाली। मेलबर्न में शतक जड़कर उन्होंने टीम इंडिया को सीरीज में वापसी दिलाई और फिर युवा खिलाड़ियों के साथ गाबा में ऑस्ट्रेलिया को हराकर 2-1 से ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीतने में अहम भूमिका निभाई।
1. डरबन (2013) – दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 96 रन
अपने दूसरे ही टेस्ट मैच में रहाणे ने दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजी आक्रमणों में शामिल डेल स्टेन, वर्नोन फिलेंडर और मोर्ने मोर्केल का डटकर सामना किया। किंग्समीड की तेज और उछालभरी पिच पर उनके 96 रन भले शतक में नहीं बदल सके, लेकिन इस पारी ने साबित कर दिया कि विदेशी परिस्थितियां उनके खेल को और निखारती हैं।
2. वेलिंगटन (2014) – न्यूजीलैंड के खिलाफ 118 रन
बेसिन रिजर्व की चुनौतीपूर्ण पिच पर भारत दबाव में था, लेकिन सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे रहाणे ने शानदार 118 रन बनाकर टीम को हार से बचाया। यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक था और इसी पारी ने उन्हें विदेशी दौरों का भरोसेमंद बल्लेबाज बना दिया।
3. मेलबर्न (2014) – ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 147 रन
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के 530 रन के जवाब में रहाणे ने 147 रनों की शानदार पारी खेली। मिचेल जॉनसन, रयान हैरिस और जोश हेजलवुड जैसे तेज गेंदबाजों के सामने उनकी तकनीक और धैर्य देखने लायक था। विराट कोहली के साथ उनकी साझेदारी ने भारत को मुकाबले में बनाए रखा।
4. लॉर्ड्स (2014) – इंग्लैंड के खिलाफ 103 रन
हर क्रिकेटर का सपना लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराने का होता है और रहाणे ने यह सपना मुश्किल हालात में पूरा किया। जब भारतीय टीम संकट में थी, तब उन्होंने 103 रन बनाकर न सिर्फ पारी को संभाला बल्कि भारत की ऐतिहासिक जीत की नींव भी रखी। यह 28 वर्षों बाद लॉर्ड्स में भारत की पहली टेस्ट जीत थी।
5. मेलबर्न (2020) – ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 112 रन
यह पारी सिर्फ शतक नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रेरणादायक अध्यायों में से एक मानी जाती है। एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद टीम का मनोबल टूट चुका था। ऐसे समय में कार्यवाहक कप्तान रहाणे ने 112 रन की संयमित और जिम्मेदार पारी खेली। रवींद्र जडेजा के साथ उनकी 121 रन की साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया। भारत ने बॉक्सिंग डे टेस्ट जीता, सीरीज बराबर की और बाद में गाबा में ऐतिहासिक जीत के साथ ट्रॉफी अपने नाम की।
विदेशी पिचों पर क्यों खास थे रहाणे?
अजिंक्य रहाणे की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी मजबूत तकनीक, धैर्य और उछालभरी पिचों पर आत्मविश्वास था। जब कई भारतीय बल्लेबाज विदेशी दौरों पर संघर्ष करते थे, तब रहाणे ने इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में लगातार यादगार पारियां खेलकर खुद को टीम इंडिया का संकटमोचक साबित किया।
उनका शांत नेतृत्व, टीम के प्रति समर्पण और दबाव में मैच जिताने की क्षमता भारतीय क्रिकेट इतिहास में लंबे समय तक याद की जाएगी। Ajinkya Rahane Retirement के साथ एक ऐसे खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय सफर समाप्त हुआ, जिसने अपने बल्ले से विदेशी धरती पर भारत की कई ऐतिहासिक जीत की कहानी लिखी।













