लखनऊ/31 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के मेधावी बच्चों की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है, जिससे भविष्य में पहले से अधिक छात्रों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इस संबंध में अधिकारियों को नई नियमावली तैयार करने और सभी पहलुओं की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश दिए।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के संचालक मंडल की 172वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना को समय की जरूरतों के अनुरूप अधिक समावेशी बनाया जाए, ताकि कृषि और गृह विज्ञान जैसे विषयों में पढ़ाई करने वाले अधिक से अधिक पात्र छात्र आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकें। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी, जो वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुझाव देगी।
नियमों की होगी समीक्षा, पात्रता में हो सकते हैं बदलाव
फिलहाल मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का लाभ उन्हीं किसानों के बच्चों को मिलता है, जो कृषि या गृह विज्ञान विषय में स्नातक अथवा परास्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को हर महीने 3,000 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
वर्तमान नियमों के अनुसार यह सुविधा गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के बच्चों को मिलती है। इसके लिए यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में कम से कम 70 प्रतिशत और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्डों में 85 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं।
अब गठित होने वाली समिति यह भी आकलन करेगी कि वर्तमान अंक सीमा में बदलाव की आवश्यकता है या नहीं। साथ ही किसानों की आय संबंधी पात्रता मानकों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि योजना का लाभ अधिक व्यापक वर्ग तक पहुंच सके।
गरीबी रेखा से ऊपर के किसानों के बच्चों को भी मिल सकता है लाभ
सरकार इस संभावना पर भी विचार करेगी कि गरीबी रेखा से ऊपर के किसानों के मेधावी बच्चों को भी मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के दायरे में शामिल किया जाए। इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों को पूरा करने वाले कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को भी योजना में शामिल करने का प्रस्ताव समीक्षा के दायरे में रहेगा।
सरकार का मानना है कि यदि पात्रता के दायरे का विस्तार किया जाता है तो कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक कारणों से पढ़ाई में आने वाली बाधाएं भी काफी हद तक कम हो सकेंगी। यही वजह है कि नई नियमावली तैयार करने से पहले सभी पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और योग्य विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।










