नई दिल्ली/03 अगस्त 2026: संसद के मानसून सत्र 2026 का तीसरा सप्ताह सोमवार से शुरू हो रहा है। सरकार इस सप्ताह अपने विधायी एजेंडे को गति देने की तैयारी में है। लोकसभा के तय कार्यक्रम के अनुसार दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जबकि एक अन्य विधेयक को सदन से पारित कराने की भी योजना है। इसके साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अतिरिक्त अनुदान मांगों को लेकर भी सदन में बयान देंगी।
संसद के पहले दो सप्ताह विपक्ष के विरोध और लगातार हंगामे के कारण कई बार बाधित रहे। ऐसे में सरकार अब तीसरे सप्ताह में लंबित विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।
लोकसभा में पेश होंगे ये दो अहम विधेयक
लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 और बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 2026 को सदन में पेश करेगी। इन दोनों विधेयकों को सरकार की प्राथमिकता वाले विधायी प्रस्तावों में शामिल किया गया है।
इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों (Supplementary Demands for Grants) से संबंधित बयान भी लोकसभा में रखेंगी।
NEET-UG विवाद की गूंज के बीच फिर गरमा सकता है सदन
मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में NEET-UG पेपर लीक मामले और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है। विपक्ष की विभिन्न मांगों को लेकर दोनों सदनों में कई बार हंगामा हुआ, जिसके चलते कार्यवाही भी बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
ऐसे में संभावना है कि तीसरे सप्ताह में भी इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है, जिससे सदन में राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
इन अन्य विधेयकों को भी आगे बढ़ाने की तैयारी
संसदीय सूत्रों के अनुसार सरकार आने वाले दिनों में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक भी लोकसभा में पेश कर सकती है।
इसके अलावा सरकार की कोशिश जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद से पारित कराने की भी रहेगी। इन विधेयकों को सरकार अपने प्रमुख विधायी एजेंडे का हिस्सा मान रही है।
13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 2026 20 जुलाई से शुरू हुआ था और इसका समापन 13 अगस्त को होना है। सत्र के शेष दिनों में सरकार अधिक से अधिक विधेयकों को सदन से पारित कराने का प्रयास करेगी, जबकि विपक्ष भी विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाए हुए है। ऐसे में तीसरे सप्ताह की कार्यवाही राजनीतिक और विधायी, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।













