लखनऊ/06 अगस्त 2026: उत्तर प्रदेश में घुमंतू विकास बोर्ड के गठन के बाद पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समाज के प्रतिनिधियों से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने जिन समुदायों को कभी ‘क्रिमिनल ट्राइब’ घोषित कर दमन का शिकार बनाया था, वे वास्तव में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के असली सेनानी थे। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इन समुदायों को उनका सम्मानजनक स्थान और पहचान मिले।
मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित आभार कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि इन समुदायों के गौरवशाली इतिहास को भी देश के सामने स्थापित करना है।
घुमंतू विकास बोर्ड से समाज के विकास को मिलेगी नई दिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1871 के क्रिमिनल ट्राइब एक्ट के तहत अंग्रेजी हुकूमत ने कई घुमंतू जातियों को अपराधी घोषित कर दिया था। आजादी के बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस कानून को समाप्त कर उन्हें विमुक्त जाति का सम्मान दिलाया, लेकिन दशकों तक उनके समग्र विकास के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार इन समुदायों के लिए आयोग का गठन हुआ और अब उत्तर प्रदेश सरकार ने घुमंतू विकास बोर्ड का गठन कर उनके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
वनटांगिया से लेकर मुसहर समाज तक योजनाओं का मिला लाभ
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राज्य सरकार ने वनटांगिया गांवों को पहली बार राजस्व गांव का दर्जा दिलाया। वहीं मुसहर समाज को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा गया। इसके अलावा थारू, बुक्सा, गोंड, चेरो, कोल, सहरिया सहित कई उपेक्षित समुदायों को सरकारी योजनाओं के दायरे में लाकर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।
सपेरा समाज की ऐतिहासिक भूमिका का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने सपेरा समाज की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समुदाय प्राचीन काल से शिवावतारी गुरु श्री गोरखनाथ की परंपरा का अनुयायी रहा है। विदेशी आक्रमणों के दौर में जब संचार के आधुनिक साधन नहीं थे, तब यही समाज भजन, लोकगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से लोगों को सचेत करने का कार्य करता था।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कहते हैं कि जिन समुदायों की वर्षों तक उपेक्षा हुई, उन्हें आज सम्मान और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम वर्तमान सरकार ने किया है।
जनजातीय विरासत को सहेजने पर भी सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रृंगवेरपुर में निषादराज गुह्य की प्रतिमा, बहराइच में महाराजा सुहेलदेव विजय स्मारक और बलरामपुर के इमिलिया कोडर में ट्राइबल म्यूजियम की स्थापना इसी सोच का हिस्सा है। इसके अलावा सोनभद्र और मिर्जापुर में भी जनजातीय संग्रहालय विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति, जनजाति और घुमंतू समाज के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था की गई है। वहीं श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय तथा स्ट्रीट वेंडर्स, श्रमिकों और विद्यार्थियों के लिए भी कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
‘घुमंतू’ से ‘टिकंतू’ बनने की ओर समाज : असीम अरुण
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि घुमंतू विकास बोर्ड विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं को विमुक्त एवं घुमंतू समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का माध्यम बनेगा। इससे इन समुदायों के जीवन में व्यापक बदलाव आएगा।
उन्होंने कहा कि परिवर्तन अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। लोगों का कहना है कि यह समाज अब केवल ‘घुमंतू’ नहीं रहा, बल्कि ‘टिकंतू’ बन रहा है। अब इनके पास अपना घर, बिजली, आजीविका के साधन और सम्मान के साथ आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।










