लखनऊ/7 अगस्त 2026: लखनऊ में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के बुनकरों और हस्तशिल्पियों की मेहनत को मंच मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण कार्यक्रम’ में विभिन्न श्रेणियों के चयनित कारीगरों को पुरस्कार राशि के चेक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सम्मान पाने वाले कारीगरों ने इसे अपने काम और परंपरागत हुनर के लिए बड़ा प्रोत्साहन बताया।
उत्तर प्रदेश में हथकरघा को मिला सम्मान, बुनकरों ने साझा किया अनुभव
कार्यक्रम में वाराणसी से पहुंचे बनारसी साड़ी कारोबारी जमालुद्दीन ने सम्मान मिलने पर खुशी जताई। उनका कहना था कि वर्ष 2017 के बाद हथकरघा क्षेत्र के लिए किए गए प्रयासों से काम का माहौल बेहतर हुआ है। राज्य स्तर पर मिला सम्मान उनके लिए केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे हुनर की पहचान भी है।
वाराणसी के ही प्यारेलाल ने सरकारी आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन को बुनकरों के लिए उपयोगी बताया। उनके अनुसार समय पर मिलने वाली मदद से कारीगर अपने पारंपरिक कारोबार को आगे बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं।
समय पर आर्थिक मदद से कारीगरों का भरोसा मजबूत
सीतापुर के अकील अहमद और हाथरस के रूप किशोर ने भी सरकार की पहल की सराहना की। उनका कहना था कि हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए बेहतर माहौल बनने से काम को आगे बढ़ाने का भरोसा बढ़ा है।
टांडा के शाहनवाज अहमद गमछा, साड़ी और दुपट्टा बनाने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी सहयोग से स्थानीय उत्पादों की मांग और उत्पादन क्षमता में सुधार महसूस हुआ है। बुनकरों के लिए ऐसी सहायता खास मायने रखती है, क्योंकि हथकरघा का काम सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी और स्थानीय पहचान से भी जुड़ा है।
महिला कारीगरों ने भी सराही सरकारी पहल
कार्यक्रम में महिला बुनकरों और कारीगरों की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही। ललितपुर की मीराबाई और इटावा की बिनाई कारीगर सोनी ने मंच से सम्मान मिलने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया।
महिला कारीगरों के मुताबिक, आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकारी सहयोग का असर उनके काम के साथ-साथ परिवार की स्थिति पर भी पड़ रहा है। हथकरघे से जुड़ी महिलाओं के लिए यह बदलाव खास है, क्योंकि घर और काम की जिम्मेदारियों के बीच उनका हुनर अब आय और पहचान, दोनों का आधार बन रहा है।
पुरस्कार से बढ़ा पारंपरिक हुनर का मनोबल
संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार समारोह का संदेश केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा। मंच पर सम्मानित कारीगरों के अनुभवों से यह बात सामने आई कि आर्थिक सहायता के साथ सम्मान और पहचान भी बुनकर समुदाय के लिए उतनी ही अहम है।
उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी, गमछा, दुपट्टा और अन्य पारंपरिक उत्पादों के पीछे हजारों परिवारों की मेहनत जुड़ी है। ऐसे में सरकारी प्रोत्साहन और बाजार से जुड़ी बेहतर संभावनाएं इस विरासत को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं।









