वाराणसी, 7 अक्टूबर 2026। काशी में बुधवार को भारत-जापान की दोस्ती को समर्पित एक नया अध्याय जुड़ गया। रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृति में बनाए गए ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच विश्वास, मित्रता और साझा विरासत का जीवंत प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की मित्रता का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं का संबंध केवल पद और प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं था। यह विश्वास पर आधारित रिश्ता था, जिसने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने में भूमिका निभाई।
आबे मेमोरियल कॉरिडोर को बताया भारत-जापान दोस्ती का प्रतीक
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 7 अक्टूबर का दिन इसलिए भी विशेष है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 2001 में नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के दिन शिंजो आबे की स्मृति को समर्पित कॉरिडोर का लोकार्पण होना दोनों नेताओं की दोस्ती की यात्रा से जुड़ा विशेष संयोग है।
मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के 140 करोड़ नागरिकों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और आज काशी उसी रुद्राक्ष में शिंजो आबे की स्मृति को स्थायी रूप से संजो रही है।
उन्होंने कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ‘जीवंत क्लासरूम’ की तरह होगा। यहां आने वाले युवा यह समझ सकेंगे कि दूरदृष्टि रखने वाला नेतृत्व दो देशों के रिश्तों को किस तरह नई दिशा दे सकता है।
2007 में हुई थी मोदी और आबे की पहली मुलाकात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की पुरानी मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
इसके बाद दोनों नेताओं के बीच संबंध लगातार मजबूत होते गए। योगी ने भारत की संसद में आबे के उस विचार का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने मजबूत भारत और मजबूत जापान को एक-दूसरे के हित में बताया था।
भारत-जापान संबंधों में काशी और क्योटो का जुड़ाव भी इसी व्यापक साझेदारी का हिस्सा बना। वर्ष 2014 में वाराणसी और क्योटो के बीच पार्टनर सिटी सहयोग की शुरुआत हुई। वर्ष 2015 में शिंजो आबे प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी आए और गंगा आरती में शामिल हुए थे। उनकी यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों की यादगार तस्वीरों में शामिल हो गई।
‘जब नेताओं की दोस्ती देशों का विश्वास बन जाए तो इतिहास बदलता है’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे ने अहमदाबाद में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की आधारशिला रखी थी। वर्ष 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर भी आमंत्रित किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दो नेताओं की व्यक्तिगत मित्रता दो देशों के बीच विश्वास का आधार बन जाती है, तो उसका असर केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रहता।
उन्होंने कहा कि 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अगले वर्ष, सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने जापान पहुंचे थे। योगी ने कहा कि यह केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं था, बल्कि दोनों नेताओं के बीच रिश्ते की गहराई को दर्शाता था।
भारत-जापान साझेदारी अब सेमीकंडक्टर और AI तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के संबंध अब केवल सांस्कृतिक और कूटनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच साझेदारी सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे उभरते क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
योगी के अनुसार, भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा। दोनों देशों की क्षमताओं का मेल आर्थिक साझेदारी को और व्यापक बना सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपनी जापान यात्रा का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश और जापानी कंपनियों के बीच निवेश सहयोग की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में जापानी निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
नोएडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी का प्रस्ताव
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जापानी कंपनियों के लिए निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित किए जाने की योजना का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ा बाजार, युवा कार्यबल, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट का मजबूत नेटवर्क है। दूसरी ओर जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक अनुभव है। दोनों का मेल राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में जापान के साथ निवेश और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क स्थापित की गई है।
2027 में भारत-जापान संबंधों के 75 साल
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे। उन्होंने आबे मेमोरियल कॉरिडोर को इस महत्वपूर्ण पड़ाव की दिशा में एक प्रतीकात्मक शुरुआत बताया।
मुख्यमंत्री ने काशी और जापान के बीच आध्यात्मिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशांबी और संकिसा जैसे बौद्ध तीर्थ उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। इस वजह से जापान की बौद्ध आस्था और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के बीच पुराना संबंध है।
योगी ने काशी और क्योटो की तुलना करते हुए कहा कि दोनों शहर अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा को समेटे हुए हैं और उन्होंने विरासत को बचाते हुए विकास का रास्ता दिखाया है।
शिंजो आबे को याद कर भावुक हुईं अकी आबे
समारोह में शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे भावुक हो गईं। उन्होंने अपने पति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच रहे आत्मीय संबंधों को याद किया। उन्होंने 2015 की काशी यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि गंगा आरती और वाराणसी की यादें शिंजो आबे अक्सर साझा करते थे।
अकी आबे ने कहा कि उनके मन में भी वाराणसी आने की इच्छा थी और अब वह इच्छा पूरी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि शिंजो आबे आज जीवित होते और अपने नाम पर बने इस कॉरिडोर को देखते, तो उन्हें बहुत खुशी होती। इस दौरान वह भावुक हो गईं।
उन्होंने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की वास्तुकला की भी सराहना की। अकी आबे ने विशेष रूप से इसकी बाहरी दीवारों पर बने 108 रुद्राक्षों का उल्लेख किया और कहा कि जापानी बौद्ध परंपरा में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है।
अकी आबे को भेंट किया गुलाबी मीनाकारी का मोर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे को वाराणसी की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी से निर्मित मोर का स्मृति चिह्न भेंट किया।
समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल, वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, विधायक सौरभ श्रीवास्तव और जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मौजूद रहे।
काशी में बना यह कॉरिडोर अब शिंजो आबे की स्मृति के साथ भारत-जापान संबंधों की उस कहानी को भी संजोएगा, जिसमें कूटनीति के साथ संस्कृति, विश्वास और व्यक्तिगत मित्रता की भूमिका रही है। मुख्यमंत्री योगी ने इसी संदर्भ में कहा कि आबे को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत और जापान की मित्रता हर गुजरते वर्ष के साथ और मजबूत होती जाए।









